सीवान सदर अस्पताल में एचआईवी संक्रमित गर्भवती का सिजेरियन, रेफरल पर उठे सवाल

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मॉडल सदर अस्पताल | Prabhat Khabar Network

मॉडल सदर अस्पताल

सीवान सदर अस्पताल ने एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला का सफल सिजेरियन कर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिलाया. लेकिन, अस्पताल द्वारा पहले रेफर किए जाने के फैसले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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सीवान: एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला को सदर अस्पताल से रेफर किये जाने का मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. परिजनों की शिकायत पर मंगलवार देर रात जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ. इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद और सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने परिजनों से संपर्क किया और महिला को वापस सदर अस्पताल बुलवाया.

परिजन करीब 70 हजार रुपये कर्ज लेकर महिला का सिजेरियन कराने के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे थे. देर रात करीब 12 बजे सिविल सर्जन की निगरानी में सदर अस्पताल में महिला का सफल सिजेरियन किया गया. ऑपरेशन के बाद महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. बुधवार सुबह आईसीटीसी के स्वास्थ्यकर्मियों ने नवजात को एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए नेविरापीन की दवा भी दी.

जब सदर अस्पताल में हुआ ऑपरेशन, तो पहले रेफर क्यों किया गया?

पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सदर अस्पताल में सिजेरियन और आवश्यक प्रसूति सेवाएं उपलब्ध थीं, तो महिला को पहले दूसरे अस्पताल में रेफर क्यों किया गया? डीएम के हस्तक्षेप के बाद जब उसी सदर अस्पताल में महिला का सुरक्षित सिजेरियन संभव हुआ, तो शुरुआती रेफरल की जरूरत क्यों पड़ी?

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के उपचार की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. खासकर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या ऐसी महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था पहले से मौजूद थी या व्यवस्था केवल शिकायत और हस्तक्षेप के बाद सक्रिय हुई.

समाचार प्रकाशित होने के बाद अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण

इधर, सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने प्रभात खबर में प्रकाशित समाचार का संज्ञान लेते हुए सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. विभाग की ओर से अब यह स्पष्ट किया जाना है कि महिला को किस परिस्थिति में रेफर किया गया था और रेफरल का निर्णय किस स्तर पर लिया गया.

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पूरे घटनाक्रम की जानकारी सिविल सर्जन को मंगलवार रात ही हो गयी थी और उनकी निगरानी में महिला का ऑपरेशन भी कराया गया. ऐसे में ऑपरेशन के बाद स्पष्टीकरण मांगने की कार्रवाई क्या जिम्मेदारी तय करने की दिशा में उठाया गया कदम है या महज औपचारिक प्रक्रिया, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्या अब संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए स्थायी व्यवस्था होगी?

इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल भविष्य की व्यवस्था को लेकर है. क्या अब सदर अस्पताल में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी या सिफिलिस जैसी संक्रामक बीमारियों से संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव और सिजेरियन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी? या आगे भी ऐसे मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता रहेगा?

यह मामला केवल एक मरीज के उपचार तक सीमित नहीं है. यह सरकारी अस्पतालों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के उपचार की व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों की जवाबदेही और स्वास्थ्य तंत्र की वास्तविक तैयारी से भी जुड़ा है.

अब नजर इस बात पर है कि विभाग की ओर से मांगे गये स्पष्टीकरण के बाद केवल कागजी कार्रवाई होती है या सदर अस्पताल की व्यवस्था में ठोस और स्थायी सुधार भी सुनिश्चित किया जाता है.

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अमरनाथ शर्मा

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By अमरनाथ शर्मा

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