आयुष्मान योजना पर इलाज में धांधली

Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 09 Dec 2025 8:22 PM

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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान वय वंदना कार्ड तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है.जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ कई निजी अस्पताल भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा इंपैनल्ड हैं.लेकिन इन योजनाओं के क्रियान्वयन में धांधली की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं

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प्रतिनिधि,सीवान. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान वय वंदना कार्ड तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है.जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ कई निजी अस्पताल भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा इंपैनल्ड हैं.लेकिन इन योजनाओं के क्रियान्वयन में धांधली की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं.मरीजों का आरोप है कि निजी अस्पताल योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि को कम बताते हुए उन्हें बेहतर इलाज न मिलने की बात कहकर अतिरिक्त पैसे वसूल रहे हैं. एक मरीज ने बताया कि वह मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने छपरा के एक प्रतिष्ठित नेत्र अस्पताल गया, जहां कर्मचारियों ने कहा कि आयुष्मान योजना के तहत विभाग केवल सात हजार रुपये देता है, इसलिए मैनुअल ऑपरेशन होगा और इसके लिए तीन दिन इंतजार करना पड़ेगा.वहीं फेको विधि से आधुनिक, बिना दर्द वाला ऑपरेशन कराने के लिए बारह हजार रुपये की मांग की गई.परेशान होकर मरीज ने मजबूरी में भुगतान कर ऑपरेशन कराया.इसी प्रकार सामान्य सर्जरी में भी मरीजों से लेप्रोस्कोपिक विधि के नाम पर पांच से सात हजार रुपये तक अतिरिक्त वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि यह सुविधा भी योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है.आश्चर्य की बात यह है कि आयुष्मान भारत योजना से इंपैनल्ड अस्पतालों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए कोई सिस्टम नहीं बनाया गया है.जिन मरीजों का आयुष्मान कार्ड से इलाज हो चुका होता है,उनकी भी फिजिकल जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं की जाती है. आयुष्मान कार्ड से इलाज कैसे मिलेगा आयुष्मान कार्ड धारक किसी भी इंपैनल्ड सरकारी या निजी अस्पताल में जाकर हेल्प डेस्क पर अपना कार्ड/आधार दिखाकर ई- केवाइसी कराते हैं. इसके बाद अस्पताल प्री–ऑथराइजेशन भेजता है और मंजूरी मिलते ही मरीज का इलाज पूरी तरह कैशलेस होना चाहिए. भर्ती, सर्जरी, दवाएं, जांच और डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक की औषधीय सेवाएं भी योजना में शामिल हैं. बोले अधिकारी आयुष्मान भारत कार्ड के लाभुकों को बेहतर तरीके से अस्पतालों को इलाज करना है.कोई अलग से पैसा नहीं देना है. अस्पताल को अगर अतिरिक्त पैसे के जरूरत है तो संबंधित विभाग से बात करे. यदि कोई अस्पताल पैसे मांगता है तो इसकी शिकायत हेल्पलाइन 14555 या 1800-111-565 पर की जा सकती है. राज किशोर प्रसाद, डीपीसी, आयुष्मान भारत योजना, सीवान.

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