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धान का भुगतान कर फंसे पैक्स

Updated at : 13 May 2024 9:46 PM (IST)
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धान का भुगतान कर फंसे पैक्स

जिले में किसानों से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद के बाद ससमय राशि का भुगतान कर पैक्स फंसे हुये है. खरीदे गये धान को पैक्स ने राइस मिल में धान की कुटाई कराकर चावल एसएफसी को क्रय केंद्रों पर जमा करा दिया है लेकिन एक माह बाद भी राशि का भुगतान बिहार राज्य खाद्य निगम के तरफ से नहीं हो रहा है.

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सीवान: जिले में किसानों से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद के बाद ससमय राशि का भुगतान कर पैक्स फंसे हुये है. खरीदे गये धान को पैक्स ने राइस मिल में धान की कुटाई कराकर चावल एसएफसी को क्रय केंद्रों पर जमा करा दिया है लेकिन एक माह बाद भी राशि का भुगतान बिहार राज्य खाद्य निगम के तरफ से नहीं हो रहा है. राशि नहीं मिलने के कारण को-ऑपरेटिव बैंक के तरफ से मिले क्रैश क्रेडिट यानी ऋण की राशि पर लगातार ब्याज बढ़ रहा है. जिससे समितियों के लिये यह काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है. अप्रैल से अब तक करीब 17 हजार 400 क्विंटल सीएमआर चावल की राशि 5 करोड़ 49 लाख रुपये एसएफसी के पास फंसा हुआ है. विभाग का तर्क है कि अभी तक मुख्यालय से राशि नहीं प्राप्त होने के कारण राशि का भुगतान समितियों के बीच नहीं हो पा रहा है. धान खरीदने के लिये 247 समितियों का चयन किया गया था. 7839 किसानों से 43712 एमटी धान की खरीद की गयी थी. जिसके बाद अब तक एसएफसी को 19 हजार 327 एमटी सीएमआर चावल उपलब्ध करा दिया गया है. को-ऑपरेटिव बैंक के तरफ से एक अरब 24 लाख 90 हजार 608 रूपये की क्रैश क्रेडिट यानी ऋण की राशि उपलब्ध करायी गयी थी. अभी तक बैंक को मात्र 47 करोड़ 64 लाख 38 रुपये ही मिलें है. विभागीय जानकारी के अनुसार धान खरीद के लिये बैंक द्वारा दिये गये कैश क्रेडिट सीसी पर 11 फीसदी ब्याज का प्रावधान है जबकि पैक्स राज्य खाद्य निगम को चावल जमा करती है तो राशि का भुगतान होता है. बीतते समय के साथ कर्ज का बोझ समितियों पर बढ़ता जा रहा है. राशि नहीं भुगतान होने की शिकायत डीसीओ से की बिहार राज्य खाद्य निगम को एक माह से चावल देने के बाद राशि भुगतान नहीं होने की शिकायत दरौंदा प्रखंड के करसौत पैक्स के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह चुनचुन सिंह ने जिला सहकारिता पदाधिकारी से शिकायत की है. उन्होंने कहा है कि जिले के सभी पैक्स और व्यापार मंडलों पर सीएमआर जल्द से जल्द गिराने हेतु सभी पदाधिकारियों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है. जबकि सीएमआर गिराने के एक माह बाद भी एसएफसी द्वारा समितियों को राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है. इसके कारण एक दर्जन से अधिक समितियों की राशि एसएफसी के पास फंसा हुआ है. उन्होंने कहा है कि कोऑपरेटिव बैंक से ब्याज पर राशि ली गयी है. लिये गये राशि पर लगातार ब्याज बढ़ने से हम लोग परेशान है. जिसके कारण समितियां घाटे में भी जा सकती है. उन्होंने मांग किया है कि जल्द से समितियों की राशि दिलाया जाये. सिर्फ 58 किसानों से ही हुई 147 एमटी गेहूं की खरीद जिले में अब तक 58 किसानों से ही 147 एमटी गेहूं की खरीद पूरी की गयी है. 168 समितियों को गेहूं खरीदने के लिये जिला प्रशासन के तरफ से अधिकृत किया गया है. गेहूं के समर्थन मूल्य और बाजार भाव में बड़ा अंतर रहने के कारण किसान सरकारी दर पर उपज बेचने को तैयार नहीं है. गेहूं का समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 2275 रुपये क्विंटल है जबकि बाजार में अभी भी राशि किसानों को अधिक मिल रहा है. जिससे वे बाजार में ही खुले में गेहूं की बिक्री कर रहे है. किसानों से गेहूं खरीदने के लिये रजिस्ट्रेशन भी किया गया है. सभी किसानों से गेहूं खरीद पूरी करने के लिये गत दिन डीसीओ ने खरीद नहीं करने वाले पैक्स को कारण नोटिस भी जारी किया था.

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