जिले में प्रदूषण से बिगड़ रही लोगों की सेहत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Nov 2019 1:08 AM (IST)
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सीवान : तकरीबन तीन लाख आबादी वाले सीवान शहर के लोगों को अब दिल्ली और पटना जैसे प्रदूषण की आशंका सताने लगी है. कारण कि बेतरतीब बसी कॉलोनियां और संकरे रास्ते पर चलती दो पहिया-तीन पहिया वाहनों की कतारें, धुआं उगलती गाड़ियां और घंटों जाम में फंसे लोगों को कभी कभी सांसें लेने में कठिनाइयों […]
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सीवान : तकरीबन तीन लाख आबादी वाले सीवान शहर के लोगों को अब दिल्ली और पटना जैसे प्रदूषण की आशंका सताने लगी है. कारण कि बेतरतीब बसी कॉलोनियां और संकरे रास्ते पर चलती दो पहिया-तीन पहिया वाहनों की कतारें, धुआं उगलती गाड़ियां और घंटों जाम में फंसे लोगों को कभी कभी सांसें लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
शहर की असली तस्वीर पेश करती इन व्यवस्थाओं के बीच हांफते खांसते लोगों को देखकर प्रदूषण की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकत है. शहर में चलने वाले ज्यादातर टेंपो 20 साल से भी ज्यादा पुराने और खटारा है. इन टेंपो से हमेशा धुआं निकलता रहता है.
ऐसे वाहनों के चलते प्रदूषण ज्यादा फैलता है. दूसरी ओर जाम भी इस शहर की नियति बन चुका है. प्रदूषण को बढ़ाने में खलनायक की भूमिका अदा कर रहा है. शहर में 15 साल से पुराने तीन पहिया वाहनों की संख्या 2.5 हजार तक है. इसमें से ज्यादातर टेंपो शहर से ग्रामीण अंचलों तक चलते हैं.
लगानी होगी निर्माण कार्य पर रोक
शहर के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण कार्य को सीमित करने की जरूरत है. इस पर रोक का कोई असर नहीं होता. क्योंकि काम कराने वाले से ज्यादा काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी के मारे जाने का डर होता है. जो उसकी रोजी-रोटी का सवाल खड़ा करता है. इसी साल मई-जून की भयानक लू के दौरान भी निर्माण कार्यों पर लगी रोक का कोई असर नहीं दिखा. क्योंकि मजदूर ही काम करने को तैयार थे, तो मकान निर्माण कराने वाला क्यों नहीं करायेगा.
प्रदूषण फैलाने में शहर में चलने वाले निर्माण कार्यों की भागीदारी एक से दो फीसदी ही होगी. ऐसे में इस पर रोक लगाने से प्रदूषण नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा. प्रदूषण का तीसरा प्रमुख कारक सड़कों पर उड़ने वाला धूल है. शहर की मुख्य सड़क ही टूटी और धूल मिट्टी से भरी हुई है.
ऐसे में हजारों वाहनों के आने जाने से यह धूल पूरे शहर तक धीरे-धीरे पहुंच ही जाता है. सुबह में सड़कों पर झाड़ू लगाते वक्त भी बहुत ज्यादा धूल उड़ता है.
शहर में खटारा वाहनों पर रोक की जरूरत
शहर में चलने वाले जुगाड़ वाहनों की बढ़ती संख्या प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण बनता जा रहा है. इन जुगाड़ों में वैसे ही टेंपो या बाइक के इंजन लगाये जाते हैं, जो सरकारी स्तर पर बंद कर दिये जाते हैं. यानी 15 साल से ज्यादा उम्र के खटारा वाहन. इन्हीं वाहनों के इंजन जुगाड़ में लगाकर धड़ल्ले से चलाये जा रहे हैं, जो वायु को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहा है.
इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के कारण इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. एक अनुमान के अनुसार केवल सीवान शहर में ही 1000 से ज्यादा जुगाड़ वाहन सब्जी और गल्ला मंडी से पूरे शहर में सब्जियां-अनाज ढोते हैं.
वहीं सीवान मुख्य शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने की समस्या नहीं के बराबर है. कुछ जगहों पर कूड़ा करकट जलाया जाता है, जिसे जन जागरण अभियान के तहत लोगों को समझाकर रोका जा सकता है. शाम के वक्त मवेशियों को मच्छर से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में धुआं किया जाता है, उसे तो रोकना संभव नहीं है. हालांकि इसका असर वायु की गुणवत्ता पर पड़ता है.
यह है हकीकत
सड़क पर दौड़ रहे हैं डगमगा बस, पिकअप व ऑटो
सैकड़ों वाहनों में नहीं हैं ब्रेक लाइट और इंडिकेटर
काउंटर पर आवेदन देने मात्र से हो जाती है जांच
फिटनेस देने के पूर्व नहीं होती है वाहनों की सही जांच
धुआं उगलते मैजिक व विक्रम बनी ग्रामीण इलाके की पहचान
मुख्यालय में भी धड़ल्ले से दौड़ते हैं धुआं देते वाहन
क्या है फिटनेस जांच के नियम
नये वाहनों की दो साल बाद होती है फिटनेस जांच
पुराने वाहनों को हरेक वर्ष लेना होता है प्रमाणपत्र
गाड़ियों को प्रमाण पत्र देने के पूर्व चला कर देखना है अनिवार्य
ब्रेक व इंजन सहित अन्य की होती है जांच
गाड़ी का देना होता है टैक्स टोकन
इंश्योरेंस देखने के बाद देना है प्रमाण पत्र
प्रदूषण जांच रिपोर्ट है प्रमाण पत्र के पूर्व जरूरी
पिछले साल के फिटनेस प्रमाण पत्र को साथ लगाना जरूरी
पेट्रोल पंपों पर नहीं है प्रदूषण जांच की व्यवस्था
सीवान शहर के पेट्रोल पंपों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. नियम के अनुसार सभी पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांचने की मुफ्त व्यवस्था होनी चाहिए. गाड़ियों में हवा कम होने के कारण भी ज्यादा ईंधन जलता है. इसलिए सभी गाड़ियों में मुफ्त हवा भरने की सुविधा अनिवार्य रूप से देनी है. सीवान में ऐसा कोई पेट्रोल पंप नहीं है, जहां प्रदूषण जांच और हवा भरने की मुफ्त व्यवस्था हो.
जिले में हैं 12 प्रदूषण जांच केंद्र
जिले में वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों की संख्या 12 है. जिसमें से सात शहर में और पांच शहर के आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं. इन केंद्रों में से चार केंद्रों पर ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किये जाते हैं. आठ प्रदूषण जांच केंद्रों को ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करने के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है.
दमा के मरीजों की बढ़ रही संख्या
सीवान सदर अस्पताल में रोजाना पांच से सात रोगी अस्थमा या दमा का इलाज कराने पहुंच रहे हैं. इसमें वे रोगी शामिल नहीं हैं जो प्राइवेट अस्पतालों या डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं. हालांकि सीवान शहर की सड़कों पर लोगों को खांसते हांफते देखा जा सकता है.
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