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हेपेटाइटिस मरीजों के लिए सदर अस्पताल में खुलेगा ट्रीटमेंट सेंटर

Updated at : 31 Jul 2019 1:28 AM (IST)
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हेपेटाइटिस मरीजों के लिए सदर अस्पताल में खुलेगा ट्रीटमेंट सेंटर

सीवान : हेपेटाइटिस के मरीजों को इलाज के लिए अब अपनी जेब से पैसे नहीं खर्च करने पड़ेंगे. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम मैनेजमेंट के तहत सदर अस्पताल में शीघ्र ट्रीटमेंट सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है. गंभीर मरीजों का इंडोर में इलाज के दौरान बीमारी की जांच […]

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सीवान : हेपेटाइटिस के मरीजों को इलाज के लिए अब अपनी जेब से पैसे नहीं खर्च करने पड़ेंगे. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम मैनेजमेंट के तहत सदर अस्पताल में शीघ्र ट्रीटमेंट सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है.

गंभीर मरीजों का इंडोर में इलाज के दौरान बीमारी की जांच के लिए नि:शुल्क सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी. वहीं मरीजों को नि:शुल्क दवा उपलब्ध कराने की स्वास्थ्य विभाग की योजना है. हेपेटाइटिस बीमारी के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है.
क्या है हेपेटाइटिस बीमारी : यह यकृत की बीमारी है. वायरल संक्रमण या यकृत के हानिकारक पदार्थों संपर्क में आने से यह बीमारी होती है. पीलिया, ज्यादा थकान, भूख कम लगना, पेट फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं. हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित अधिकांश लोगों को वायरस से लड़ने और संक्रमण से पूरी तरह ठीक होने में दो माह लगते हैं. इसके क्रॉनिक होने पर जान जाने का खतरा रहता है.
इसी तरह हेपेटाइटिस-सी वायरस, संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, वीर्य और योनि से निकलने वाले तरल पदार्थों में पाया जाता है. लंबे समय तक अल्कोहल लेने वालों को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस हो जाता है. हेपेटाइटिस-डी उन लोगों को होता है, जो पहले से हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित होते हैं.
टीबी व एड्स से भी खतरनाक है हेपेटाइटिस : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरल हेपेटाइटिस को टीबी व एड्स से भी खतरनाक माना है. वायरल हेपेटाइटिस में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और इ आते हैं. भारत में एक करोड़ से अधिक हेपेटाइटिस सी के मरीज हैं.
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 2.85 प्रतिशत मौतें इसकी वजह से हुई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने वायरल हेपेटाइटिस को वर्ष 2030 तक समाप्त करने का संकल्प लिया था. इसी क्रम में भारत सरकार ने भी वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्धता जताते हुए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है.
हेपेटाइटिस के कारण
हेपेटाइटिस- ए : दूषित आहार और पानी
हेपेटाइटिस- बी : संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य आदि से
हेपेटाइटिस- सी : संक्रमित रक्त और इंजेक्शन से
हेपेटाइटिस- डी : हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित व्यक्ति को होता है
हेपेटाइटिस- इ : दूषित पानी
बोले सिविल सर्जन
नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत सदर अस्पताल में शीघ्र हेपेटाइटिस मरीजों के इलाज के लिए ट्रीटमेंट सेंटर खोला जायेगा. इसमें मरीजों को नि:शुल्क दवा के साथ साथ पैथोलॉजिकल जांच की भी सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. इसकी तैयारियां शुरू कर दी गयी है.
डॉ अशेष कुमार, सिविल सर्जन सीवान
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