सीवान : देखेब ए नीतीश बाबू, फेन से चालू न होखे दारू

Updated at : 05 Apr 2018 8:17 AM (IST)
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सीवान : देखेब ए नीतीश बाबू, फेन से चालू न होखे दारू

बड़हरिया (सीवान) : ए नीतीश बाबू, देखेब फेन से मत चालू होखे दारू. हमनी के नरक होत जिनगी के रउरा बचा लेहनी. ये उद्गार प्रखंड की नवलपुर पंचायत के कन्हौली गांव के स्व रंगी राम की पत्नी संजोगिया कुंवर के हैं. 75 साल की संजोगिया देवी ने 35 घरों की इस बस्ती में रोज शाम […]

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बड़हरिया (सीवान) : ए नीतीश बाबू, देखेब फेन से मत चालू होखे दारू. हमनी के नरक होत जिनगी के रउरा बचा लेहनी. ये उद्गार प्रखंड की नवलपुर पंचायत के कन्हौली गांव के स्व रंगी राम की पत्नी संजोगिया कुंवर के हैं. 75 साल की संजोगिया देवी ने 35 घरों की इस बस्ती में रोज शाम को मारने-पीटने के बाद निकली महिलाओं की कारुणिक आवाजें सुनी हैं.

बेवजह लड़ते लोगों के सिर फूटते देखे हैं. शराब के कारण कई हंसते-खेलते परिवारों को बर्बाद होते देखा है. घरों को नाहक टूटते, उजड़ते व बिखरते देखा है. शराबबंदी की चर्चा होते ही संजोगिया कुंवर की आंखों के सामने शराबबंदी के पहले वे तमाम मंजर तैरने लगते हैं और वह अचानक सिहर जाती है. किसी ने संजोगिया कुंवर से फिर से शराब चालू होने की बात कह दी है. वह गांव पहुंचे रिपोर्टर से इसकी दरियाफ्त करना चाहती है.

जब उसे इत्मीनान हो जाता है कि फिर शराब नहीं बिकेगी तो उसकी बुझी-बुझी-सी आंखें फिर चमक जाती हैं. वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फिर अाशीष देने लगती हैं. कहती हैं नीतीश बाबू के यश बढ़ो. ऊंहा के बड़ा नीमन काम कईले बानी दारु बन कराके. संजोगिया कुंवर की बातों में दम है.

वह अपनी बस्ती की बदलती तस्वीर देख रही है. उसे सुकून है कि दो सालों से गांव के लोग आपस में नहीं भिड़े हैं. अब रात को गांव की महिलाओं की चीखने की आवाज नहीं आती है. अनावश्यक गाली-गलौज नहीं होती और उससे बड़ी बात यह है कि गांव के बच्चों में पढ़ाई-लिखाई की ललक जगी. शराबबंदी के बाद गांव में आये बदलाव स्पष्ट नजर आने लगे हैं. मेहनत-मजदूरी का पैसा सीधे घर आने लगा है. अब लोगों को अपने आशियाने को चुस्त-दुरुस्त करने की फिक्र है.

कुछ अधूरे घर बनने लगे हैं. श्री मांझी कहते हैं कि नशे में जो सब्जियां खरीदने के बावजूद बाजार में छूट जाती थीं, अब वह घर आने लगी हैं. वे कहते हैं कि घरेलू हिंसा नहीं के बराबर है. पारिवारिक कलह खत्म हो चुके हैं. सभी अपनी धुन में हैं. वे चाहते हैं कि कमाई दो पैसे घर आये. बच्चे पढ़-लिख कर नौकरी या कारोबार करें. श्रीभगवान राम कहते हैं कि शराब अपने साथ कई बीमारियां लेकर आती थी.

कमाई का पैसा डॉक्टर के पास चला जाता था. अब वहीं चेहरे चमकने लगे हैं. दो सालों में गांव के दर्जनभर लड़कों-लड़कियों ने मैट्रिक व इंटर की परीक्षा पास की है. उमाशंकर राम का पुत्र राकेश कुमार आईटीआई कर रहा है तो घरभरन राम की बेटी किरण इंटर पास कर चुकी है.

यह सुखद बदलाव सबको सुहाने लगा है. कन्हौली दलित बस्ती के वीरेंद्र राम, जवाहर राम, विनोद राम, योगेंद्र मांझी, ओसिहर मांझी, अवधेश मांझी, किशोर मांझी आदि एक स्वर से प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहते हैं कि हम नीतीश जी के सामाजिक आंदोलन के साथ हैं.

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