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तीन दिन सात डिग्री रहेगा न्यूनतम तापमान

पिछले तीन सप्ताह से भी अधिक समय से प्रकृति ठंड के रूप में अपना रौद्र रूप धारण की हुई है. ठंड से लोगों का हाल बेहाल है.

सीतामढ़ी. पिछले तीन सप्ताह से भी अधिक समय से प्रकृति ठंड के रूप में अपना रौद्र रूप धारण की हुई है. ठंड से लोगों का हाल बेहाल है. एक दिन भी कनकनी से राहत नहीं मिल पा रही है, मानों जिले में हिमपात हो रही हो. पारा में लगातार गिरावट जारी है. सर्द पछुआ हवा रुकने का नाम नहीं ले रही है. लगातार ओस की बौछारें पड़ रही है. ठंड धीरे-धीरे असामान्य होती जा रही है. तीन दिन दोपहर को तीन-चार घंटे के लिये धूप निकलने के बाद शुक्रवार को फिर से शीतलहर ने अपना रौद्र रूप दिखाया. आसमान में दिन भर घना कोहरा छाया रहा, जिसके चलते सूरज दिखायी नहीं दिया. वातावरण में आंशिक रूप से दिन भर फॉग छाया रहा. सर्द पछुआ हवा प्रतिदिन की गति से चलती रही. जिला कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विभाग के पदाधिकारी राकेश कुमार से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को पहली बार जिले का न्यूनतम तापमान सात व अधिकतम तापमान 17 डिग्री के निचले स्तर पर दर्ज किया गया. ग्रामीण इलाकों में तमाम मवेशी घरों में अलाव की व्यवस्था दिखी. गांव से शहर तक हर कोई अलाव का सहारा लेने को मजबूर दिखे. व्यापारी हो, दुकानदार हो या फुटपाथी दुकानदार, सभी अलाव का सहारा लेने को मजबूर दिखे. शुक्रवार का दिन इस वर्ष अबतक का सबसे ठंडा दिन रहा. हालांकि, अगले तीन दिन तक ठंड की यही स्थिति रहने का अनुमानन जताया गया है. शनिवार और रविवार को भी जिले का न्यूनतम तापमान सात डिग्री ही रहने का पूर्वानुमान है. हालांकि, अधिकतम तापमान की बात करें, तो शनिवार को 18 व रविवार को 21 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. जाहिर है कि फिलहाल इस प्रचंड ठंड से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है, इसलिये सावधानी के साथ दैनिक कार्यों को निबटाने के सिवाय फिलहाल कोई चारा नहीं है.

अत्यधिक ठंड में फसलों में प्रकाश संश्लेशन प्रक्रिया हो जाती है बाधित

पुपरी. विगत करीब तीन सप्ताह से जारी प्रचंड ठंड से फसलों को बचाने को लेकर जिला कृषि विज्ञान केंद्र के सस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद ने किसानों के लिये आवश्यक जानकारियां साझा की है. बताया है कि तापमान में गिरावट के कारण फसल में प्रकाश संश्लेशन प्रक्रिया बाधित हो जाती है. दूसरी तरफ, रबी फसलों के पौधों की कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करके ऑक्सिजन रिलीज करने की प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न होती है. इससे फसल के पौधे मिट्टी के पोषक तत्वों को भी ग्रहण नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण फसलों पर पीलापन आ जाता है. जब तापमान पांच डिग्री से नीचे चला जाता है, तो पाला पड़ने की संभावना पैदा हो जाती है.

— रबी व आलू की फसलों को ऐसे बचायें

बताया कि रबी फसलों के पौधों में जायलम और फ्लोयम संरचनायें बाधित हो जाती है और फसल में पानी जमने लगता है. इसके कारण फसल की पत्तियों पर काले धब्बे पड़ने लगते हैं और पत्तियां झुलसने लगती हैं. आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग की शिकायत कहीं कहीं देखने को मिल रही है. इसमें आलू के पौधों की पत्तियों व तने काले पड़ने लगते है. पतियों के नीचे रुई बनने लगती है और आलू का कंद छोटा एवं सड़ने लगता है. इसके लिए मैनकोजेब दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करें. आठ-दस दिन के बाद दूसरा स्प्रे रिडोमिल एमजेड दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करे. गेंहूं की फसल में खरपतवार के नियंत्रण के लिए क्लोडीनो फाप् 160 ग्राम एवं मेट सलफुरोन आठ ग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें. इससे चौड़ी एवं संकरी सभी प्रकार के खरपतवार नियंत्रन हो जायेगा एवं गेंहूं पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

— मसूर के पौधों में जड़ से सूखने की आ रही समस्या, तो स्प्रे करें

बताया कि मसूर के पौधों में अभी जड़ से सूखने की समस्या आ रही है. इसके लिए स्ट्रेप्टो सायिकलिन एक ग्राम प्रति पांच लीटर पानी की दर से जड़ से सटाकर स्प्रे करें. कम तापमान पर फसलों के बचाव के लिये दो ग्राम गंधक प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे कर फसलों को बचा सकते हैं.

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