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बिहार के सीतामढ़ी में फर्जी सर्टिफिकेट पर शिक्षक व शिक्षिका की नौकरी, 19 वर्षों बाद खुली पोल

जिले में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक बहाल हुए थे. विजिलेंस की जांच में एक-एक कर फर्जी रूप से बहाल शिक्षक व शिक्षिका बेनकाब हो रहे हैं.

सीतामढ़ी. जिले में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक बहाल हुए थे. विजिलेंस की जांच में एक-एक कर फर्जी रूप से बहाल शिक्षक व शिक्षिका बेनकाब हो रहे हैं. हद तो यह कि हाइकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अवैध सर्टिफिकेट पर बहाल शिक्षक नौकरी छोड़ रहे हैं. इस बीच, जिले में फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर बहाल दो शिक्षिका व एक शिक्षक पकड़े गए है. निगरानी के पुलिस अवर निरीक्षक गणेश कुमार ने इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी के लिए थानों में आवेदन दिया है.

वर्ष 2006 से 15 तक नियोजित की जांच

गौरतलब है कि हाइकोर्ट के आदेश पर विजिलेंस के द्वारा सूबे में वर्ष 2006 से 15 तक नियोजित शिक्षक और शिक्षिकाओं के नियोजन की वैधता की जांच कर रही है. पूर्व में हाइकोर्ट के स्तर से कहा गया था कि जो भी नियोजित शिक्षक फर्जी तरीके से बहाल है, वो स्वेच्छा से नौकरी छोड़ देते है, तो उनके खिलाफ न तो कानूनी कार्रवाई होगी ओर न वेतन की वसूली होगी. अवैध बहाल होते हुए नौकरी नहीं छोड़ने पर कानूनी कार्रवाई और वेतन की वसूली दोनों कार्रवाई होगी. फिर भी बहुत सारे शिक्षक नहीं छोड़े सके. खबर है कि ऐसे 105 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जा चुकी है.

तीन और शिक्षकों पर भी कार्रवाई

जिले के परसौनी, बोखड़ा व बेलसंड प्रखंड के तीन शिक्षक व शिक्षिका फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में फंसे हैं. विजिलेंस की जांच में उक्त तीनों के मैट्रिक समकक्ष मध्यमा व इंटरमीडिएट के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं. विजिलेंस ने परसौनी थानाध्यक्ष को भेजे आवेदन में परसौनी प्रखंड के प्रावि. आनंदी साह डेरा, देमा की पंचायत शिक्षिका कुमारी आरती रानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया है. शिक्षिका का मध्यमा अंकपत्र बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से सत्यापन कराने पर फर्जी पाया गया है. वह वर्ष- 2006 में बहाल हुई थी.

संस्कृत शिक्षा बोर्ड से सत्यापन

इधर, बोखड़ा थानाध्यक्ष को भेजे आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2006 में नियोजित बोखड़ा प्रखंड की शिक्षिका रूना पासवान का मध्यमा का अंक पत्र फर्जी पाया गया है. वह मध्य विद्यालय, भाउरगढ़ में कार्यरत है. इन दोनों शिक्षिकाओं के तमाम सर्टिफिकेट डीपीओ, स्थापना ने विजिलेंस को उपलब्ध कराया था. उधर, बेलसंड थानाध्यक्ष को प्रखंड शिक्षक सुधांशु कुमार के खिलाफ प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया गया है. वे वर्ष 2006 में बहाल हुए थे. फिलहाल मध्य विद्यालय, कंसार में पदस्थापित हैं. उनका भी इंटर का अंकपत्र सत्यापन में फर्जी पाया गया है.

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