कथित फर्जी प्राथमिकी में फंसे बैरगनिया के तत्कालीन थानाध्यक्ष, एसपी ने डीएसपी से कराई जांच

Updated at : 17 Jan 2026 9:27 PM (IST)
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कथित फर्जी प्राथमिकी में फंसे बैरगनिया के तत्कालीन थानाध्यक्ष, एसपी ने डीएसपी से कराई जांच

सीतामढ़ी जिला पुलिस के अफसर बीच-बीच में ऐसा काम कर जाते है, जिससे पुलिस महकमें की बदनामी होती है और पुलिस से लोगों का विश्वास उठ जाता है.

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सीतामढ़ी जिला पुलिस के अफसर बीच-बीच में ऐसा काम कर जाते है, जिससे पुलिस महकमें की बदनामी होती है और पुलिस से लोगों का विश्वास उठ जाता है. लोगों को भरोसा नहीं होता है कि किसी मामले में निर्दोष है, तो पुलिस से न्याय मिलेगी. कुछ इसी तरह के मामले में बैरगनिया के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर उमाशंकर रजक फंसे है. उनकी कार्यशैली से एसपी खफा हैं. दरअसल, कथित फर्जी आवेदन के आलोक में प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में रजक बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं.

मुख्यालय डीएसपी को जांच का जिम्मा

उक्त प्रकरण की खबर पर एसपी अमित रंजन गंभीर है. उन्होंने मुख्यालय डीएसपी को मामले की जांच सौंपी है. डीएसपी थाना में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से यह जांच करेंगे कि संबंधित महिला थाना पर पहुंच कर आवेदन दी थी अथवा थानाध्यक्ष रहे रजक फर्जी आवेदन पर प्राथमिकी किए थे. वैसे रजक ने एसपी को यह बताया है कि महिला थाना पर पहुंच आवेदन दी थी. एसपी को रजक का एक ऑडियो भी मिला है, यह ऑडियो ही उनकी गले का बड़ा फांस बन गया है. इस बीच, गत दिन एसपी रंजन ने रजक को बैरगनिया थानाध्यक्ष की कुर्सी से मुक्त कर दिया था. माना जा रहा है कि उसी कथित फर्जी प्राथमिकी के प्रकरण में ही प्रथम दृष्टया दोषी मानकर रजक को बैरगनिया थाना से हटाया गया है.

अब जाने क्या है पूरा मामला

बैरगनिया थाना क्षेत्र के मसहां नरोत्तम गांव के तुलसी राम की पत्नी रीता देवी ने थाना में कथित आवेदन दी थी, जिसमें कहा था कि डुमरवाना निवासी डॉ राजदेव झारखंड के करमाडाह पीएचसी में है. वे झारखंड से जब भी डुमरवाना आवास पर आते थे, काम के लिए उसे बुलाते थे. छह सितंबर 25 को भी वह काम करने गई थी. आठ सितंबर को डॉ राजदेव ड्यूटी पर जाने लगे, तो वो उनसे पैसे की मांग की. पैसे शाम में देने की बात कही. शाम में पैसे मांगने पर चिकित्सक ने उसके साथ गाली-गलौज की. उसके साथ मारपीट भी की. गिरने से वह अर्धनग्न भी हो गयी थी. प्राथमिकी में डॉक्टर पर अन्य कई गंभीर आरोप लगाए गए थे.

महिला का प्राथमिकी से इंकार

बताया गया है कि इस केस के पूर्व के अनुसंधानक एएसआइ कमोद कुमार थे. उन्होंने गांव में पहुंचकर पीड़िता रीता देवी का बयान लिया, जहां उसने दर्जनों लोगों की मौजूदगी में स्वीकार किया कि वो न तो डॉक्टर को जानती है और न कोई प्राथमिकी ही दर्ज करायी है. उक्त बयान के बाद आइओ ने सदर एसडीपीओ वन से दिशा-निर्देश की मांग की. एसडीपीओ ने उन्हें महिला को लेकर कार्यालय में बुलाया. एसडीपीओ ने महिला का बयान लिया. उसने बयान में प्राथमिकी कराने से इंकार किया. यही बयान वह कोर्ट में भी दी है.

महिला निरक्षर, प्राथमिकी पर हस्ताक्षर

बताया गया है कि कथित पीड़ित रीता देवी निरक्षर है, जबकि प्राथमिकी पर उसका हस्ताक्षर दिखाया गया है. इससे भी प्राथमिकी के फर्जी आवेदन के आधार पर होने का दावा किया जा रहा है. गौरतलब है कि रीता देवी पंचायत के एक सरकारी स्कूल में रसोइया का काम करती है. फिलहाल उक्त केस के आइओ बलराम कुमार हैं. इधर, खबर मिली है कि इस प्रकरण में श्यामदेव नामक एक व्यक्ति का भी हाथ बताया जा रहा है. कथित तौर पर इसी शख्स ने चिकित्सक को एससी/एसटी एक्ट के तहत फंसाने का पूरा ताना-बाना बना था. बहरहाल, हर किसी को मुख्यालय डीएसपी की जांच रिपोर्ट व उसके आलोक में एसपी के स्तर से कार्रवाई का इंतजार है.

रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जायेगी

मुख्यालय डीएसपी को मामले की जांच का जिम्मा दिया गया है. एसएचओ का कहना है कि महिला थाना में आकर आवेदन दी थी. सीसीटीवी व अन्य तथ्यों के आधार पर डीएसपी को जांच करने को कहा गया है. रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.

अमित रंजन, एसपी.

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