Sitamarhi News: सीतामढ़ी में सुलग रही भूमि आंदोलन की आग, पुनौरा सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट के विरोध में 1 जून को महाधरना
Published by : Aaruni Thakur Updated At : 29 May 2026 9:49 PM
किसान मोर्चा की बैठक में उपस्थित पदाधिकारी व अन्य
Sitamarhi News: सीतामढ़ी के पुनौरा में सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लैंड पुलिंग योजना का विरोध शुरू हो गया है. संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा ने किसानों की 45% जमीन बिना मुआवजे के लेने का आरोप लगाते हुए 1 जून के धरने का समर्थन किया है.
Sitamarhi News: सीतामढ़ी जिले के पुनौरा में प्रस्तावित सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर विरोध तेज हो गया है. शुक्रवार को संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा की जिला कमेटी की बैठक में इस प्रोजेक्ट के तहत लागू होने वाली लैंड पुलिंग योजना पर कड़ा ऐतराज जताया गया. मोर्चा ने आगामी 1 जून को ‘भूमि बचाओ संघर्ष समिति’ द्वारा आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शन का पुरजोर समर्थन करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है. इसके साथ ही बिहार सरकार से इस किसान-मजदूर विरोधी प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द करने की मांग की गई है.
आंदोलन की त्वरित जानकारी सारणी (Quick Info Table)
| आंदोलन के मुख्य बिंदु | योजना और विरोध का विवरण |
|---|---|
| प्रस्तावित प्रोजेक्ट | सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट (लैंड पुलिंग योजना) |
| प्रभावित क्षेत्र | पुनौरा, सीतामढ़ी |
| धरने की आगामी तिथि | 1 जून |
| विरोध का नेतृत्व | भूमि बचाओ संघर्ष समिति एवं संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा |
| बैठक की अध्यक्षता | जलंधर यदुवंशी (जिलाध्यक्ष, संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा) |
मुआवजा दिए बिना 45% जमीन छीनने का आरोप
मोर्चा के जिलाध्यक्ष जलंधर यदुवंशी की अध्यक्षता में पारित प्रस्ताव में सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई. बैठक में किसानों ने इस प्रोजेक्ट से होने वाले नुकसानों को रेखांकित किया:
- बिना मुआवजे के जमीन: किसानों का आरोप है कि इस योजना के तहत बिना उचित मुआवजा दिए उनकी 45% जमीन छीनी जा रही है, जो माता सीता की इस कृषि प्रधान धरती के साथ सरासर अन्याय है.
- खेती और पर्यावरण को नुकसान: इस प्रोजेक्ट के कारण स्थानीय खेती पूरी तरह उजड़ जाएगी. इसके अलावा हजारों की संख्या में पेड़ और पोखर नष्ट हो जाएंगे, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण का संकट खड़ा हो जाएगा.
- रीगा चीनी मिल पर संकट: जमीन अधिग्रहण के कारण रीगा चीनी मिल को कच्चा माल (गन्ना) मिलने का मुख्य स्रोत हमेशा के लिए बंद हो जाएगा, जिससे मिल और उससे जुड़े किसानों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा.
- पहले से अधिग्रहित जमीन का हवाला: मोर्चा का कहना है कि जिले में पहले ही औद्योगीकरण, एक्सप्रेस-वे, राम-जानकी पथ, नेशनल हाईवे (NH) और रेलवे के नाम पर किसानों की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन ली जा चुकी है. ऐसे में अब और जमीन देना किसानों के अस्तित्व को मिटाने जैसा है.
बैठक में शामिल रहे प्रमुख नेता व बुद्धिजीवी
इस महत्वपूर्ण बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए जिले के कई प्रमुख लोग और किसान नेता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
प्रो. आनंद किशोर, बैद्यनाथ हाथी, नवीन कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, अमरेंद्र राय, शशिधर शर्मा, अवधेश यादव, नंदकिशोर मंडल, चंद्रदेव मंडल, नवल किशोर प्रसाद यादव, अश्विनी कुमार मिश्र और रामसुरेश तिवारी. इन सभी नेताओं ने एकजुट होकर 1 जून के आंदोलन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया है.
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लेखक के बारे में
By Aaruni Thakur
प्रभात खबर में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत आरुणि ठाकुर, पत्रकारिता के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हैं। देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वर्तमान में वे समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर कर रहे हैं। विस्तार न्यूज और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में अनुभव प्राप्त आरुणि को हाइपरलोकल खबरों, राजनीति और डॉक्यूमेंट्री निर्माण में विशेष रुचि है।
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