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फसल अवशेष को जलाने से छोटे बच्चों को सांस लेने समेत कई बीमारी

फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर समाहरणालय में गुरुवार को अन्तर्विभागीय कार्य समूह की बैठक आयोजित किया गया. जिसकी अध्यक्षता डीएम रिची पांडेय ने किया.

डुमरा. फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर समाहरणालय में गुरुवार को अन्तर्विभागीय कार्य समूह की बैठक आयोजित किया गया. जिसकी अध्यक्षता डीएम रिची पांडेय ने किया. बताया गया कि किसानों द्वारा मजूदरों के अभाव में फसलों विशेषकर धान व गेहूं कटनी के उपरांत फसल अवशेष खेतों में ही जला दिया जाता है, जिसके कारण मिट्टी, स्वास्थ्य व पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ता है. इस संबंध में किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता है. डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभिन्न विभागों को इसमें सक्रिय सहयोग के लिए दायित्व निर्धारण किया. उन्होंने आत्मा व कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आयोजित होने वाली रबी कर्मशाला एवं किसान चौपाल में भी इसको प्राथमिकता के आधार पर प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया. फसल अवशेष को जलाने से छोटे बच्चों को सांस लेने में कठिनाई आंख, नाक व गला में जलन सहित अन्य बिमारियों की संभावना के बारे में स्वास्थ्य विभाग को निदेशित किया गया कि एएनएम व आशा कार्यकर्त्ता के माध्यम से इस संबंध में लोगों को जागरूक करें. शिक्षा विभाग को फसल अवशेष नही जलाने के संबंध में छात्र-छात्राओं के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता तथा चित्रकला के माध्यम से जागरूक करने का निर्देश दिया गया. प्रखंडों में कार्यरत जीविका दीदी तथा मनरेगा कार्यकर्त्ताओं द्वारा इस संबंध में जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया गया. पशु एवं मस्त्य विभाग में कार्यरत कर्मियों द्वारा फसल बताया गया कि कटनी के पश्चात फसल अवशेष को पशुओं को चराने के लिए किसानों को जागरूक करने के लिए जिला पशुपालन अधिकारी को निदेश दिया गया. वहीं डीसीओ को प्रखंडों में कार्यरत पैक्सों तथा प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों को इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा किसानों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया.जिला कृषि अधिकारी ब्रजेश कुमार ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के तहत 21 प्रकार के कृषि यंत्रों पर सरकार द्वारा अनुदान की व्यवस्था की गई है, जिसमें मुख्यतः स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रीपर कम बाईण्डर, ब्रश कटर व जिरोटिलेज समेत अन्य यंत्र शामिल है. डीएम ने निदेश दिया कि बिना अनुमति के कम्बाईन हार्वेस्टर परिचालन नही किया जायेगा. कम्बाईन हार्वेस्टर से कंटाई के लिए संचालनकर्त्ता को जिला कृषि अधिकारी से अनुमति प्राप्त करना होगा. साथ ही संचालनकर्त्ता को एक शपथ पत्र देना होगा कि फसल कटाई के पश्चात फसल अवशेषों को नही जलायेगें.

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