सहबाजपुर में कचरा भवन निर्माण के लिए काट डाले हरे-भरे पेड़, वन विभाग ने किया जब्त

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अवैध तरीके से हरा-भरा पेड़ काटा, वन विभाग ने की कार्रवाई

फोटो-2 कटा पेड़ जब्त करते वनकर्मी. | Prabhat Khabar Network

सहबाजपुर पंचायत में सरकारी जमीन पर लगे हरे-भरे पेड़ों को कचरा भवन निर्माण के नाम पर काटा गया. ग्रामीणों की सजगता के बाद वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की लकड़ियां जब्त कीं.

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illegal tree cutting: सीतामढ़ी जिला अंतर्गत रीगा प्रखंड क्षेत्र की सहबाजपुर पंचायत में सरकारी जमीन पर लगे हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काटने का एक गंभीर मामला सामने आया है. यह घटना सहबाजपुर पंचायत के बराही गांव स्थित पुरानी धार नदी के किनारे की है, जहां बिहार सरकार की जमीन पर वन विभाग और मनरेगा के तहत वृक्षारोपण किया गया था.

कचरा भवन निर्माण के नाम पर काटा गया पेड़

मिली जानकारी के अनुसार, उक्त चिन्हित स्थान पर पंचायत कोष से डब्ल्यूपीयू (कचरा प्रसंस्करण भवन) का निर्माण कराया जा रहा था. भवन निर्माण के लिए जगह खाली करने के उद्देश्य से वहां लगे दो विशाल और हरे-भरे पेड़ों को नियमों को ताक पर रखकर काट दिया गया.

ग्रामीणों की सजगता से डीएफओ ने लिया एक्शन

जब पंचायत स्तर पर पेड़ों की कटाई की जा रही थी, तब स्थानीय ग्रामीण हरेंद्र कुमार सिंह, नरेंद्र सिंह, राकेश कुमार, बिकाउ सहनी और वीरेंद्र सिंह सहित अन्य सजग ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया. ग्रामीणों ने इसकी त्वरित सूचना सीधे डीएफओ (Divisional Forest Officer) अनीता राज को दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ ने तुरंत रेंजर को कार्रवाई के निर्देश दिए.

बिना अनुमति के हुई कटाई, रेंजर ने की जब्ती

डीएफओ अनीता राज के निर्देश पर रेंजर राजेश कुमार अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से काटे गए दोनों पेड़ों की लकड़ियों को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया. रेंजर राजेश कुमार ने स्पष्ट तौर पर बताया कि कचरा भवन या किसी भी अन्य निर्माण कार्य के लिए वन विभाग द्वारा पेड़ काटने का कोई आदेश या अनुमति (NOC) नहीं दी गई थी. बिना विभागीय आदेश के हरे पेड़ काटना पूरी तरह अवैध है और इस मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.


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राकेश कुमार राज

लेखक के बारे में

By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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