अब किसान सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान और अधिकार दोनों मजबूत होंगे. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी एग्रीस्टैक योजना के तहत शिवहर जिले में खेती को तकनीक से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू हो गई है. इस डिजिटल इकोसिस्टम से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा.
शिवहर. देशभर में कृषि को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एग्रीस्टैक यानी डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम योजना अब शिवहर जिले में धरातल पर उतर चुकी है. इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि क्षेत्र का समग्र विकास और सरकारी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है.बीमा से जुड़ी जानकारियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर
जिला कृषि पदाधिकारी प्रीति कुमारी ने बताया कि एग्रीस्टैक के तहत कृषि विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिलकर किसानों के भूमि अभिलेख, फसल विवरण, कृषि इनपुट, ऋण और बीमा से जुड़ी जानकारियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर रहे हैं. इससे खेती से जुड़े सभी लाभ और सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेंगी.किसानों को योजनाओं का पूरा लाभ सीधे मिलेगा
इस योजना के अंतर्गत शिवहर जिले सहित राज्य के सभी रैयती किसानों को आधार की तर्ज पर एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाएगी. इसके जरिए पीएम किसान योजना की राशि सीधे किसानों के जन धन बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी. साथ ही किसानों को आसान ऋण, फसल बीमा, आपदा सहायता का त्वरित निपटारा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ मिलेगा. बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसानों को योजनाओं का पूरा लाभ सीधे मिलेगा.लाभकारी व्यवसाय साबित होगी खेती
एग्रीस्टैक से कृषि क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा. स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और एग्रीटेक कंपनियां इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों के लिए बेहतर सेवाएं और समाधान उपलब्ध करा सकेंगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे दीर्घकाल में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने में मदद मिलेगी.इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के निर्देश पर कृषि और राजस्व विभाग के बीच नियमित समन्वय बैठकें की जा रही हैं. पंचायत और हल्का स्तर पर कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है. अद्यतन जमाबंदी, भू-अभिलेख शुद्धिकरण, नक्शा डिजिटलीकरण और जियो-रेफरेंसिंग को एग्रीस्टैक से अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है.
डिजिटल तकनीक बढ़ायेगी आय
डीबीटी को प्रभावी बनाने के लिए जिन किसानों का जन धन खाता नहीं है, उनके खाते खुलवाने के लिए जिले के सभी बैंकों को निर्देश दिए गए हैं. इस कार्यक्रम की क्रियान्वयन अवधि 21 जनवरी तक निर्धारित की गई है. अधिकारियों का दावा है कि एग्रीस्टैक न सिर्फ शिवहर, बल्कि पूरे राज्य में खेती की तस्वीर बदलेगा, जहां डिजिटल तकनीक के सहारे किसान सशक्त होंगे और उनकी आय बढ़ेगी.
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