ePaper

अल्लाह के प्रति अटूट भक्ति व समर्पण की याद में मनाया जाता है बकरीद

Updated at : 06 Jun 2025 9:25 PM (IST)
विज्ञापन
अल्लाह के प्रति अटूट भक्ति व समर्पण की याद में मनाया जाता है बकरीद

इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार " बकरीद " जिसे ईद-उल-अजहा या ईद-उल-जुहा के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व हर साल इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है.

विज्ञापन

परिहार. इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार ” बकरीद ” जिसे ईद-उल-अजहा या ईद-उल-जुहा के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व हर साल इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. इस बार यह पर्व सात से नौ जून तक मनाई जाएगी. यह त्योहार रमजान की समाप्ति के करीब 70 दिनों बाद आता है और हज के साथ भी जुड़ा हुआ है. इस्लामिक मान्यताओं में बकरीद का महत्व कुर्बानी की परंपरा से जुड़ा हुआ है. बकरीद का त्योहार पैगम्बर हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण की याद में मनाया जाता है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम को अल्लाह (ईश्वर) ने सपने में अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का आदेश दिया. इब्राहिम, जिन्हें 80 वर्ष की आयु में बेटा इस्माइल नसीब हुआ था, अपने बेटे से बेहद प्यार करते थे. फिर भी, उन्होंने अल्लाह के हुक्म का पालन करने का निर्णय लिया. जब उन्होंने इस्माइल को कुर्बानी के लिए तैयार किया, तो इस्माइल ने भी सहर्ष सहमति दी. लेकिन जैसे ही इब्राहिम ने कुर्बानी शुरू की, अल्लाह ने चमत्कार किया और इस्माइल की जगह एक मेमने (दुंबा) को कुर्बान कर दिया. इस घटना ने इब्राहिम की भक्ति और आज्ञाकारिता को सिद्ध किया और तब से बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई.

— कुर्बानी के लिए जानवर का स्वस्थ व बालिग होना जरूरी

इस दिन मुसलमान हलाल जानवर जैसे बकरे, भेड़ या ऊंट की कुर्बानी देते हैं. कुर्बानी के लिए जानवर का स्वस्थ और बालिग होना जरूरी है. कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और तीसरा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए. यह हर सक्षम मुसलमान के लिए वाजिब (जरूरी) माना गया है. यह पर्व हज के साथ भी जुड़ा है, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. हज के दौरान भी कुर्बानी की जाती है, जो हजरत इब्राहिम और उनके परिवार की कुर्बानी को याद करता है. इस पर्व पर मुसलमान नमाज अदा करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ खुशियां बांटते हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा बलिदान वही है, जो दूसरों के लिए किया जाए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
VINAY PANDEY

लेखक के बारे में

By VINAY PANDEY

VINAY PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन