नदियों के तट पर मेले का आयोजन

Published at :15 Nov 2016 3:23 AM (IST)
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नदियों के तट पर मेले का आयोजन

बेली गांव स्थित लखनदेई नदी के उत्तराहिणी तट पर लगा मेला नदी में स्नान से मिलती है पापों से मुक्ति सुप्पी : कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान का विशेष महत्त्व है. नदी के तट पर पूरी रात तंत्र-मंत्र करने वाले लोग नाच-गा कर देवी-देवताओं को खुश करने के लिए बलि प्रदान भी किये जाते […]

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बेली गांव स्थित लखनदेई नदी के उत्तराहिणी तट पर लगा मेला

नदी में स्नान से मिलती है पापों से मुक्ति
सुप्पी : कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान का विशेष महत्त्व है. नदी के तट पर पूरी रात तंत्र-मंत्र करने वाले लोग नाच-गा कर देवी-देवताओं को खुश करने के लिए बलि प्रदान भी किये जाते हैं. बताया जाता है कि वर्षों पूर्व यह मेला महीनों तक चलता था. स्नान करने के लिए रविवार की रात से हीं विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु बागमती नदी के तट पर आने लगे थे. स्थानीय राजू सिंह, रवींद्र सिंह व धड़ीछन बैठा ने बताया कि मेला में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के स्तर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. संयोग है कि नदी के तट पर बने बाबा भोलेनाथ मंदिर परिसर में कई चापाकल है,
अन्यथा श्रद्धालु पीने के पानी के लिए भी तरस जाते. सुप्पी थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार द्वारा मेला में विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए होमगार्ड व चौकीदारों की प्रतिनियुक्ति की गयी है. वैसे वे खुद गस्त लगा रहे थे. आचार्य पंडित देवनारायण झा बाते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा की सुबह नदी में स्नान करने पर पापों से मुक्ति मिलने के साथ हीं संबंधित व्यक्ति को स्वर्ग लोग की प्राप्ति होती है. ऐसा रामायण में भी उल्लेख है.
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