भगवान बोधायन की तपोभूमि का होगा कायाकल्प

Updated at : 28 Aug 2016 1:19 AM (IST)
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भगवान बोधायन की तपोभूमि का होगा कायाकल्प

मंदिर पर आठ कार्यों की अनुशंसा सीतामढ़ी : बाजपट्टी प्रखंड के वनगांव स्थित भगवान बोधायन स्थल का कायाकल्प होगा. देर से ही सही प्रशासन ने बोधायन स्थल की महत्ता को समझा है. कल तक यह स्थल प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की ओर से उपेक्षित था. अब जनप्रतिनिधि के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी कोशिश कर रहे हैं […]

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मंदिर पर आठ कार्यों की अनुशंसा

सीतामढ़ी : बाजपट्टी प्रखंड के वनगांव स्थित भगवान बोधायन स्थल का कायाकल्प होगा. देर से ही सही प्रशासन ने बोधायन स्थल की महत्ता को समझा है. कल तक यह स्थल प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की ओर से उपेक्षित था. अब जनप्रतिनिधि के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी कोशिश कर रहे हैं कि कैसे बोधयन की कर्मभूमि व तपोभूमि का विकास व सौंदर्यीकरण हो. बाजपट्टी सीओ ने डीएम को रिपोर्ट की है कि उनके प्रखंड में जितने बड़े भू-भाग में बोधायन मंदिर का परिसर है, उतना किसी मंदिर का नहीं है. सीओ द्वारा मंदिर परिसर को एक आकर्षक व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की अनुशंसा की गयी थी. पत्र में यह बताया गया है कि बोधायन मंदिर के विकास के लिए कौन-कौन से कार्यों को कराना आवश्यक है.
इन कार्यों की हुई अनुशंसा
पर्यटन विभाग के सरकार के अपर सचिव को भेजे पत्र में डीएम राजीव रौशन ने बोधायन मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए आठ बिंदुओं पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की है. बताया है कि मंदिर परिसर स्थित तालाब की उड़ाही एवं उसके चारों ओर पक्का घाट का निर्माण आवश्यक है. परिसर में मिट्टीकरण व सोलिंग की भी जरूरत बतायी गयी है. सरकार से मंदिर परिसर की चाहरदिवारी के निर्माण की भी अनुशंसा की गयी है. डीएम ने बताया है
कि सभागार व शौचालय की व्यवस्था अति आवश्यक है. मंदिर परिसर में पर्याप्त प्रकाश के लिए सोलर लाइट की व्यवस्था के साथ ही एक यात्री विश्राम भवन के निर्माण की भी अनुशंसा की गयी है.
मुख्य सड़क से मंदिर तक सड़क निर्माण कराने का भी पत्र में उल्लेख किया गया है. सीओ ने अपने पत्र में लिखा है कि मंदिर के मंहत रामप्रसन्न दास के नाम से मंदिर की भूमि का जमाबंदी कायम है.
भगवान बोधायन की जन्म स्थली को लेकर पूर्व में संशय था. दार्शनिकों व विद्वानों में उक्त बात को लेकर काफी मतभेद था. वनगांव निवासी व रिटायर माल बाबू सुनिल झा बताते हैं कि इनके जन्म स्थान को लेकर विद्वानों के बीच दक्षिण भारत में कई महीनों तक शास्त्रार्थ चला था. उसी में यह निष्कर्ष निकला था कि वनगांव की धरती ही भगवान बोधायन की जन्म व साधना स्थली है. बोधायन का महाप्रस्थान सूरत के निकट हुआ था, जो स्थल बोधायनेश्वर के नाम से आज भी विख्यात है.
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