3500 आबादी, पर सुविधाएं नदारद

Updated at :09 Aug 2016 5:37 AM
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3500 आबादी, पर सुविधाएं नदारद

जिल्लत की जिंदगी जी रहे ग्रामीण सीतामढ़ी : नगर का वार्ड नंबर-4 हर मामले में पिछड़ा हुआ है. यहां के वार्ड पार्षद भी अनुसूचित जाति से आते हैं. वार्ड की आबादी करीब 3500 व वोटरों की संख्या करीब 1900 है, जिसमें से अधिकांश आबादी दलित-महादलित व अल्पसंख्यकों की है. वार्ड में पक्की सड़क, नाला, पेयजल, […]

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जिल्लत की जिंदगी जी रहे ग्रामीण

सीतामढ़ी : नगर का वार्ड नंबर-4 हर मामले में पिछड़ा हुआ है. यहां के वार्ड पार्षद भी अनुसूचित जाति से आते हैं. वार्ड की आबादी करीब 3500 व वोटरों की संख्या करीब 1900 है, जिसमें से अधिकांश आबादी दलित-महादलित व अल्पसंख्यकों की है.
वार्ड में पक्की सड़क, नाला, पेयजल, शौचालय, शिक्षा व स्वास्थ्य समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. किसी भी मायने में वार्ड शहर जैसा नहीं दिखता है. जगह-जगह गंदगी व जलजमाव का नजारा दिखता है. वार्ड की जनता नगर परिषद से इतना खफा है कि यदि पदाधिकारी वार्ड में चले जायें तो उन्हें भारी आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है. कुछ महिलाएं कार्यपालक पदाधिकारी व सभापति के खिलाफ अपना गुस्से का इजहार कर रही थी. महिलाओं का कहना था कि बरसात के दिनों में उन लोगों को जिल्लत की जिंदगी जीना पड़ता है.
घरों में नाले व बरसात का पानी घुस जाता है, जिससे घर में रह पाना भी मुश्किल हो जाता है. गंदगी के कारण मोहल्ले के लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से परेशान रहते हैं. बिजली का हाल ठीक नहीं है. कई मोहल्लों में अब तक तार व पोल तक नहीं पहुंचाया जा सका है.
लोग बांस व बल्ले के सहारे बिजली का उपयोग करने को मजबूर है, जबकि बिजली बील समय से चुकाना पड़ता है. वार्ड में दो कुआं है, जो पूरी तरह से जर्जर हो कर ठप हो गया है. वार्ड में दो महारानी स्थान है, जहां जलजमाव के कारण श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने में परेशानी होती है. दो विद्यालय भी है, जिसकी हालात कहीं से भी ठीक नहीं कहा जा सकता है.
वार्ड पार्षद जुगेश्वर पासवान से मिली जानकारी के अनुसार उनके कार्यकाल में अब तक वार्ड में करीब आधा दर्जन पीसीसी सड़क व नाला, आठ चापाकल, कुछ सोलर लाइट व अन्य तरह का काम हुआ है. लेकिन वह नाकाफी है. मच्छरों के प्रकोप से लोग परेशान हैं. जलजमाव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है. दर्जनों गरीब परिवारों को पेंशन व आवास समेत विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. कुल मिला कर वार्ड नंबर-4 अभी विकास से कोसों दूर है.
नगर परिषद के रवैये से परेशान है वार्ड की जनता
वार्ड पार्षद जुगेश्वर पासवान ने बताया कि नगर परिषद के पदाधिकारियों के रवैये से वे परेशान हैं. वार्ड की जनता उनसे काफी खफा है. लोगों को क्या जबाव दें, कुछ समझ में नहीं आता है. कई वार्डों में पोल चाहिए, नहीं मिल रहा है. लो वोल्टेज की समस्या से लोग परेशान है. दलित-महादलित व अल्पसंख्यकों की संख्या करीब सात सौ से भी अधिक है, लेकिन उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 30 लोगों की सूची देने को कहा गया था. उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर 27 परिवारों की सूची सौंपा था, लेकिन मात्र 11 लोगों के नाम से आवास की स्वीकृति मिली है. जिसके कारण कई गरीब परिवार उनसे नाराज है.
नगर परिषद द्वारा वार्ड के साथ भेद-भाव किया जाता है. गरीबों को पेंशन व इंदिरा आवास का लाभ नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण कई परिवारों को बरसात के मौसम आते ही जिल्लत की जिंदगी जीना पड़ता है. कई सड़कें टूटा हुआ है, जिस पर वाहनों का चलता तो दूर, पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है. जलजमाव व गंदगी सबसे बड़ी समस्या है. घर में पानी घुसता है, जिसके कारण घर में रहना मुश्किल हो जाता है. वार्ड में बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य की स्थिति दयनीय है.
मुरसीदा खातून, गृहिणी
वार्ड में समस्या ही समस्या है. सबसे बड़ी समस्या जलजमाव व गंदगी की है. गंदगी के कारण असहनीय बदबू से घरों में रहना तक मुश्किल हो जाता है, लेकिन वार्ड की जनता का कोई सुनने वाला नहीं है. पेयजल की समस्या बरकरार है. आज भी लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है. नाली के अभाव में सड़कों पर पानी बहता है, जिसके कारण सड़कें टूट रही है. डस्टवीन के अभाव में लोग यत्र-तत्र कचरा फेंक देते हैं, जिसके कारण मोहल्ले में बदबू फैला हुआ रहता है.
मरियम खातून, गृहिणी
वार्ड के लोग अभी भी सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. वार्ड में पक्की सड़क, नाला, पेयजल, शौचालय, बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य का घोर अभाव है. लोग समस्याओं से परेशान है, लेकिन उनका सुनने वाला कोई नहीं है. विकास के इस दौड़ में भी वार्ड में किसी तरह का विकास कार्य नहीं किया गया है. महीनों से सड़कें टूटी हुई है, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं करायी जा रही है. शहर से निकलने वाला पानी यहां के सड़क के ऊपर से बहता है, जिसके कारण सड़क टूट चुका है.
मो सोएब, स्थानीय निवासी
वार्ड में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, जिसको विकास कहा जा सके. लोग जलजमाव, बिजली, पेयजल, शौचालय, सड़क व नाला समेत विभिन्न समस्याओं के मकड़जाल में फंस कर रह गया है. चुनाव के समय तरह-तरह का प्रलोभन दिया जाता है, लेकिन बाद में लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं. स्थानीय वार्ड पार्षद समस्याओं का समाधान कराना चाहते हैं, लेकिन भेदभाव के कारण उनकी नहीं सुनी जा रही है. वार्ड की जनता के पास समस्याओं का तांता लगा हुआ है.
मुस्तफा मंसूरी, स्थानीय निवासी
खेत मजदूरों के सशक्त संगठन पर िदया बल
27 अगस्त को पटना में राज्यस्तरीय कन्वेंशन
21, 22 व 23 अक्तूबर को सीतामढ़ी में राज्य सम्मेलन
सीतामढ़ी . जिला खेत मजदूर यूनियन की विस्तारित बैठक मेहसौल चौक स्थित भाकपा कार्यालय परिसर में सुरेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में हुई.
बैठक में यूनियन के जिला महासचिव नवल किशोर राउत ने वर्तमान परिस्थिति में खेत मजदूरों के सशक्त संगठन की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया के पेट भरने के लिए अन्न उपजाने वाला मजदूर आज राज्य व केंद्र की उपेक्षा के कारण भूखा व नंगा जीवन जीने पर विवश है. यूनियन के राज्य महासचिव जानकी पासवान ने कहा कि सोची समझी साजिश के तहत दलित छात्रों की छात्रवृत्ति में कटौती, मजदूर अधिकारों का हनन एवं दलित महिलाओं पर हमला किया जा रहा है. यूनियन के राज्य सचिव डॉ रामाकांत अकेला ने कहा कि दलित उत्पीड़न के खिलाफ 27 अगस्त को पटना में राज्यस्तरीय कन्वेंशन होगा. उक्त कन्वेंशन में जेएनयू के व्याख्याता प्रो हरीश वानखेड़े, प्रो सुबोध नारायण मालाकार, यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव नागेंद्र नाथ ओझा भाग लेंगे. डॉ अकेला ने कहा कि यूनियन का राज्य सम्मेलन आगामी 21, 22 एवं 23 अक्तूबर को सीतामढ़ी में होगा.
13 को समाहरणालय पर धरना: उक्त सम्मेलन को लेकर 51 सदस्यीय स्वागत समिति का गठन किया गया. एक लाख यूनियन की सदस्यता का लक्ष्य रखा गया है. यूनियन दलित उत्पीड़न के खिलाफ 13 अगस्त को समाहरणालय के समक्ष आंबेडकर स्थल पर धरना देने का निर्णय लिया गया. बैठक में भाकपा के जिला मंत्री राजकिशोर ठाकुर, पूर्व सचिव जयप्रकाश राय, मो ग्यासुद्दीन, अमित कुमार, सुमित कुमार, अतुल बिहारी मिश्रा, शत्रुध्न सहनी, अंशु कुमार, सोनेलाल पासवान, इंदल दास, गणेश दास, भरत सिंह, सुरेश बैठा समेत कई लोग शामिल थे.
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