32 के बजाय 10 दवा ही है उपलब्ध परेशानी. मरीजों के प्रति लापरवाही

Updated at :07 Aug 2016 6:17 AM
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32 के बजाय 10 दवा ही है उपलब्ध परेशानी. मरीजों के प्रति लापरवाही

दवा की कमी से मरीज बेहाल सीतामढ़ी : शहर स्थित सदर अस्पताल में दवाओं की काफी कमी है. मरीज परेशान हाल में है. इससे वाकिफ रहने के बावजूद अधिकारी उतना गंभीर नहीं है, जितना होना चाहिए. उक्त अस्पताल में प्रतिदिन सात सौ-आठ सौ मरीज आते है. इनमें अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते है. […]

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दवा की कमी से मरीज बेहाल

सीतामढ़ी : शहर स्थित सदर अस्पताल में दवाओं की काफी कमी है. मरीज परेशान हाल में है. इससे वाकिफ रहने के बावजूद अधिकारी उतना गंभीर नहीं है, जितना होना चाहिए. उक्त अस्पताल में प्रतिदिन सात सौ-आठ सौ मरीज आते है.
इनमें अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते है. वैसे भी कहा जाता है कि सरकारी अस्पताल में विशेष कर गरीब तबका के लोग ही आते है. यहां भी इन गरीबों को समुचित चिकित्सा नहीं मिल पा रही है. और तो और उन्हें पेन किलर, बुखार, कफ व एंटिबायटिक दवाएं भी नहीं मिल पा रही है. यह कहने में दो मत नहीं कि सदर अस्पताल बाहर से जितना चमक रहा है, अंदर से उतना ही खोखला है.
अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किये जाते है. कहने के लिए गरीबों को समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराने को राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है, पर यह जानकर हैरानी होगी कि आउटडोर में 32 के बजाय मात्र 10 प्रकार की दवा उपलब्ध है. इन दवाओं में अधिकांश वैसे है, जिनका उपयोग इस मौसम में काफी होता है. दवा भंडारण कर्मी उमाशंकर प्रसाद ने बताया कि पेट व एलर्जी के अलावा अन्य प्रकार की दवाएं उपलब्ध है. बताया कि आज के समय में सर्दी, जुकाम व बुखार की मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है, लेकिन उक्त बीमारियों में से एक की भी दवा उपलब्ध नहीं है.
बिना दवा लिये लौटे मरीज
दरभंगा के जाले थाने के चंद्रदीपा गांव के मो जसमुद्दीन अपने 16 वर्षीय पुत्र मो तौसिफ को इलाज कराने के लिए अस्पताल में लाये थे. चिकित्सक ने मरीज को देखा तो जरूर, पर पुरजा पर लिखी गयी दवाएं नहीं मिल सकी. शिवहर के धनकौल के भिखारी महतो, शहर के मिरचाईपट्टी के विनय महतो, रून्नीसैदपुर के प्रेमनगर की शर्मिला देवी, डुमरा जेल रोड की जुही वर्मा व बाजपट्टी के मधुबन की नइमा खातून समेत दर्जनों मरीजों ने बताया कि बिना दवा के ही यहां से जाना पड़ रहा है. सरकार की चिकित्सा व्यवस्था की पोल खुल गयी.
मरीज करें तो क्या करें: अस्पताल के ही एक चिकित्सक ने बताया, सरकार का निर्देश है कि परची पर बाहरी दवा नहीं लिखना है, अन्यथा कार्रवाई होगी. वहीं, दूसरी ओर अस्पताल में दवा नहीं रहने के कारण मरीज व उनके परिजन से हर समय कहा-सुनी की स्थिति बनी रहती है. यानी न तो मरीज बाहर से दवा खरीद सकते है और न यहां दवा उपलब्ध है तो मरीज करे तो क्या करे. अस्पताल उपाधीक्षक डॉ पीपी लोहिया ने बताया कि दवा के लिए सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है. दवा नहीं रहने से काफी परेशानी होती है.
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