बंदिश है लब पर, जिक्र.. गीता भवन, डुमरा में कवि-गोष्ठी का आयोजन

Updated at :01 Aug 2016 6:21 AM
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बंदिश है लब पर, जिक्र.. गीता भवन, डुमरा में कवि-गोष्ठी का आयोजन

सीतामढ़ी : जिले की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को डुमरा गीता भवन स्थित वाचनालय में कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया. कवि-गोष्ठी से पूर्व साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों ने हिंदी की लब्ध प्रतिष्ठित लेखिका महाश्वेता देवी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम का […]

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सीतामढ़ी : जिले की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को डुमरा गीता भवन स्थित वाचनालय में कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया. कवि-गोष्ठी से पूर्व साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों ने हिंदी की लब्ध प्रतिष्ठित लेखिका महाश्वेता देवी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम का आगाज गीतकार गीतेश की गजल बंदिश है लब पर, जिक्र मुहब्बत का कैसे छेड़ेगी, कफस में कैद है बुलबुल, तराना कैसे टेरेगी से हुआ.

प्रतिभा की धनी बाल कवयित्री शम्मी कुमारी ने नेपाली कविता मेरो सानो घर छ से कार्यक्रम को रंगीन बना दिया. डॉ आनंद प्रकाश वर्मा की गजल न पूछ मेरी मुहब्बत के उजड़े फसाने को अभी, मैं वो गीत हूं जिसे साज न कोई मिल पाया ने महफिल को गति प्रदान की. रामकृष्ण सिंह वेदांती की कविता आधी रात में पंछी बोले, मेरा मनमा डगमग डोले एवं जितेंद्र झा आजाद की गजल न मजहब करते हैं ने विशेष छाप छोड़ दी.
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