चाकूबाजी की घटना से फैल जाती थी सनसनी
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :21 Jun 2016 7:03 AM
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पुलिस रिकार्ड बताता है कि 1995 के आसपास बिहार में सीतामढ़ी जिला : की गिनती एक शांत जिला के रूप में होती थी. उस वक्त कॉलेज में चाकूबाजी की छोटी-छोटी घटनाओं से आसपास के इलाका में सन्नाटा फैल जाता था. इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों के साथ पुलिस पूरी कठोरता बरतती […]
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पुलिस रिकार्ड बताता है कि 1995 के आसपास बिहार में
सीतामढ़ी जिला : की गिनती एक शांत जिला के रूप में होती थी. उस वक्त कॉलेज में चाकूबाजी की छोटी-छोटी घटनाओं से आसपास के इलाका में सन्नाटा फैल जाता था. इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों के साथ पुलिस पूरी कठोरता बरतती थी.
जिस कारण दूसरे बदमाश किसी तरह की बदमाशी करने से डरते थे. ऐसे बदमाशों को शांत करने को लेकर तत्कालीन डीएसपी नागेंद्र चौधरी का नाम आज भी संभ्रांत लोग इज्जत व बदमाश खौफ के साथ लेते है. वर्तमान एसपी की छवि भी ऐसी ही है, लेकिन कुछ पुलिस पदाधिकारियों के खराब व्यवहार व ईमानदार नहीं रहने के कारण जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. सैकड़ों लोगों के बीच वाहन चालकों से 10 रुपया की वसूली कर पुलिस की छवि खराब करने में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका भी कम नहीं है.
संतोष को फॉलो कर रहे युवा अपराधी
जिले के आपराधिक इतिहास को देखने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि आपराधिक प्रवृत्ति के युवा वर्ग शातिर अपराधी संतोष झा को फॉलो कर रहे है. सामंतवादी प्रथा के खिलाफ बंदूक उठाने के बाद बिहार पिपुल्स लिबरेशन आर्मी नामक आपराधिक संगठन को खड़ा कर नायक से खलनायक बने संतोष झा ने युवा वर्ग को एक ट्रैक उपलब्ध कराया. जहां उन्हें शराब व कबाब समेत अन्य भौतिक सुखों का लालच देकर अपराध की अंधेरी दुनिया में धकेल दिया गया.
उदाहरण के तौर पर लेवी नहीं मिलने पर संतोष के इशारे पर इंजीनियर व व्यापारियों की हत्या कर आतंक का माहौल बनाने वाला चिरंजीवी सागर, लंकेश झा, ऋषि झा, विकास झा व सरोज राय सामने है. जो जेल की सलाखों के पीछे है और उनका परिवार फांकाकसी की जिंदगी जी रहा है. इसके अलावा , नवाब टाइगर, बुलेट सिंह, डब्लू सिंह, विमलेंदु सिंह, मोहन बैठा, मुक्का, सुशील झा, सत्येंद्र ठाकुर, बबलू झा, छोटू सिंह, राकेश दास, सर्वेश दास, अरविंद सिंह, मनोज यादव, बंडावा व हरेंद्र सहनी के आपराधिक संगठन के खौफ से भी जिला में आतंक का माहौल बना रहा.
जिले के संगठित गिरोह
बिहार पिपुल्स लिबरेशन आर्मी
परशुराम सेना
आजाद हिंद फौज
सरोज एंड कंपनी
बिहार पिपुल्स टाइगर आर्मी
भाई जी एंड कंपनी
छोटू एंड कंपनी
वर्तमान में सक्रिय गिरोह
बिहार पिपुल्स लिबरेशन आर्मी
राकेश राय एंड कंपनी
केशव सिंह एंड कंपनी
न्यू क्षत्रिय संगठन फौज
मांगी थी 20 लाख की रंगदारी
सनसनी
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