रूह की पाकीजगी के लिए रखते हैं रोजा

Updated at :09 Jun 2016 5:59 AM
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रूह की पाकीजगी के लिए रखते हैं रोजा

सीतामढ़ी : इस्लामिक कैलेंडर का पवित्र महीना रमजान बीते मंगलवार यानि सात जून से शुरू हो गया. इस महीने तीस रोजे रखे जाते है़ रोजा सभी वयस्क महिला व पुरुष पर फर्ज है़ रोजेदार के लिए प्रात: काल तकरीबन सवा तीन बजे के बाद से खाना-पीना वर्जित रहता है़ संध्या पौने सात बजे ही रोजा […]

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सीतामढ़ी : इस्लामिक कैलेंडर का पवित्र महीना रमजान बीते मंगलवार यानि सात जून से शुरू हो गया. इस महीने तीस रोजे रखे जाते है़ रोजा सभी वयस्क महिला व पुरुष पर फर्ज है़ रोजेदार के लिए प्रात: काल तकरीबन सवा तीन बजे के बाद से खाना-पीना वर्जित रहता है़ संध्या पौने सात बजे ही रोजा खोलने के साथ खाने पीने का सिलसिला शुरू होता है़ इस महीने में एक विशेष नमाज बीस रकअत तरावाही पढी जाती है़

जिसमें पूरे कुरान का पाठ होता
इस्लामिक मामलों के जानकार मौलाना मोहम्म्मद आलम ने बताया कि रोजा रूह की पाकीजगी का बेहतरीन अमल है़ रमजान का रोजा इस्लाम का एक अहम फर्ज है़ इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना रमजान तमाम महीनों में अफजल है, क्योंकि इसी महीने में कुरान पाक नाजिल हुआ़ यह महीना खुदा को इतना प्यारा है कि इसके एक दिन का सवाब बंदे को सत्तर गुणा बढा कर दिया
जाता है़
रमजान में हर रोज गुनाहगारों को दोजख से आजाद किया जाता है़ इस महीने में जन्नत के सभी दरवाजे खोल दिये जाते है़
रमजान के है तीन खास अशरे-रमजान के महीने को तीन अशरों यानि अवधियों में बांटा गया है पहले दस दिनों की अवधि रहमत की कहलाती है़ यानि शुरू के दस दिनों में बंदो पर खुदा की रहमत बरसती है़ दूसरा अशरा मगफिरत का होता है़ इसमें जो बंदा अपने गुनाहों की माफी मांगता है अल्लाह उसे कबूल फरमाता है़ दूसरा अशरा निजात यानि जहन्न्म से छुटकारे का़ इस तरह देखा जाये तो रमजान का महीना मुसलमानों के लिए अल्लाह की रहमतों से मालामाल होने का महीना है़
रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है-रमजान के महीने में इंसान खुद का हर बुराई से दूर कर सकता़ इसलिए रोजे में हर नफस यानि इच्छाओं पर काबू रखना जरूरी है़ रोजा केवल पेट का ही नहीं बल्कि मुंह , कान और आंख का भी है़ रोजे के दौरान बुरी बात न बोलना, न सुनना और न देखना रोजे का ही अमल है़ रमजान के महीने में बंदा अपने रब की रजामंदी के लिए भूखे प्यासे रहकर खुद को अल्लाह की इबादत में मशगूल कर लेता है़ अपने रब की खुशी के लिए तकलीफ उठाता है इसलिए खुदा बंदे की हर दुआ कुबूल फरमाता है़
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