सीतामढ़ी : जिले में आतंक का पर्याय बन चुके हरेंद्र सहनी उर्फ भाईजी के मारे जाने की चरचा है. ऐसा कहा जा रहा है कि वो गैंगवार में मारा गया है. हाल के महीनों में भाईजी आपराधिक घटनाओं को लेकर चरचा में आया था. वो पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका था. लगभग हर घटना में भाईजी गैंग का नाम आ रहा था. रंगदारी के लिए हत्या व गोलीबारी उसके गैंग की ओर से लगातार की जा रही थी. पुलिस अधिकारी दबी जुबान से भाईजी के मारे जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से उसकी हत्या की न पुष्टि कर रहे हैं और न ही इससे इनकार कर रहे हैं.
विश्वस्त् सूत्रों के अनुसार, बीते अप्रैल महीने में भाईजी अपने खास शागिर्द विवेक के साथ व्यापारी से रंगदारी की राशि वसूलने के लिए बैरगनिया रेलवे स्टेशन पर गया था. उसी वक्त कुछ नकाबपोशों ने उसका अपहरण कर लिया. यह देख कर विवेक वहां से भाग कर अपने घर सोनबरसा आ गया. भाईजी के अपहरण के दूसरे-तीसरे दिन सोनबरसा से सटे नेपाल के मलंगवा
गैंगवार में मारा…
जिले के सरेह में युवक का शव मिला था. सीमा से सटे होने के कारण सोनबरसा के लोग शव देखने पहुंचे.
स्थानीय लोग बताते हैं कि शव देखनेवालों में विवेक भी शामिल था. वो शव देख कर परेशान हो गया था. इसके बाद विवेक ने अपनी करतूत के बारे में घरवालों को बताया और एक राजनेता से बात की. वह आत्मसमर्पण करता है और मंडलकारा भेज दिया जाता है. इधर, नेपाल में बरामद शव को कुछ लोग भाईजी का शव बता रहे है, तो कुछ लोग इनकार भी कर रहे हैं.
बरामद शव के पास से उसके शिनाख्त से संबंधित किसी तरह का कागजात नहीं मिला था. नेपाल के मलंगवा पुलिस मुख्यालय से उस युवक का फोटो मिली है, जिसे भाईजी बताया जा रहा है. मलंगवा मुख्यालय के डीएसपी सह पुलिस प्रवक्ता सीताराम रजालि कहते हैं कि शव की शिनाख्त नहीं हो पायी थी. हमलावरों ने शायद उसकी पहचान छुपाने के लिए सभी कागजात निकाल लिये थे.
अप्रैल से सुर्खियों में नहीं आया भाइजी
सात अप्रैल को भाईजी पर आरोप लगा था कि उसने मोहन बाजार के व्यवसायी राजीव पूर्वे को गोली मारी है. इसके बाद से उसकी ओर से किसी तरह की वारदात सामने नहीं आयी. इससे पहले उसकी ओर से ताबड़तोड़ रंगदारी की मांग की जा रही थी. इधर, भाईजी की हत्या की भनक लगने के बाद जेल से अपना काला कारोबार करने वाले गैंगस्टर शांत हो गये हैं. कहा जा रहा है कि भाइजी के बारे में मालूम होने के बाद गैंगस्टर पूरी तरह खौफजदा हो गये है.
मोबाइल भेज मांगता था रंगदारी
भाईजी अपने भेजे मोबाइल से रंगदारी की मांग करता था. बताते हैं कि रंगदारी के परचा के साथ वो सिम लगा मोबाइल भी भेजता था. उसी पर रंगदारी के लिए फोन करता था. रंगदारी की राशि के साथ मोबाइल भी वापस ले लेता था. पुलिस सूत्रों के अनुसार भाईजी बहुत कम सोता था. खासतौर पर घटना को अंजाम देने के बाद पूरी रात बस से एक जगह से दूसरे जगह सफर करता रह जाता था, जिस कारण ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद भी पुलिस को उसके पकड़ने में कभी कामयाबी नहीं मिली. इसी साल जनवरी में बराही के चिंतामन गांव में सीमेंट व्यवसायी की हत्या के बाद से भाईजी सुर्खियों में आया था. इसके बाद से सात अप्रैल तक वो लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहा था.
हाल में ताबड़तोड़ अपराध से आया था चर्चा में
हत्या पर सस्पेंस बरकरार पुलिस ने नहीं किया इनकार
दबी जुबान हो रही हत्या की चरचा
रंगदारी वसूलने गया था बैरगनिया
नकाबपोश अपराधियों ने बैरगनिया रेलवे स्टेशन से किया था अगवा
नेपाली गिरोह पर शक
तीनों कारणों में सबसे अधिक शक नेपाली अपराधियों पर किया जा रहा है. कारण है कि राजीव पूर्वे पर जानलेवा हमला के बाद जिला पुलिस के मोस्टवांटेड में शामिल भाईजी ने अपना ठिकाना नेपाल में बना लिया था. वह धीरे-धीरे वहां भी अपने संगठन का विस्तार कर रहा था, जो नेपाली अपराधियों को रास नहीं आ रहा था. कहा जा रहा है कि वहां नेपाली अपराधियों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई थी.