181 करोड़ रुपये है बकाया

Updated at :21 May 2016 5:05 AM
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181 करोड़ रुपये है बकाया

परेशानी. किताबों में बंद है 14 दिनों के भुगतान का आदेश दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं राज्य के गन्ना किसान ईख काश्तकार संघ के महासचिव ने सीएम को भेजा पत्र सूद का पैसा भी नहीं मिल रहा गन्ना किसानों को सीतामढ़ी : राज्य के 11 जिलों के पास ईख मूल्य का 181 करोड़ […]

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परेशानी. किताबों में बंद है 14 दिनों के भुगतान का आदेश

दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं राज्य के गन्ना किसान
ईख काश्तकार संघ के महासचिव ने सीएम को भेजा पत्र
सूद का पैसा भी नहीं मिल रहा गन्ना किसानों को
सीतामढ़ी : राज्य के 11 जिलों के पास ईख मूल्य का 181 करोड़ रुपये बकाया है. 14 दिनों के अंदर भुगतान का कानून किताबों में लिखा पड़ा है और किसान महीनों, सालों दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं.
राज्य सरकार ने मिल मालिकों को 16.75 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान दिया है और ईख काश्तकार को पांच रुपये प्रति क्विंटल. दोनों अनुदान की राशि किसानों के खाते में जानी है, परंतु ईख विभाग ने एक अजीबोगरीब शर्त लगा दी है कि जो मिल जितना भुगतान करेगा, उसी अनुपात में अनुदान देय होगा.
मतलब की जो सक्षम मिल भुगतान कर दिया उसे अनुदान की राशि मिल गयी और जो मिल तंगी के चलते भुगतान में पिछड़ गयी उसे अनुदान नहीं मिला. यानी किसान भुगतान से वंचित रह गये. अगर 16.75 रुपये प्रति क्विंटल सीधे किसानों के खाता में डाल दिया जाये तो उतनी राशि तो किसानों को मिल जायेगी. पांच रुपये प्रति क्विंटल तो बहुतेरे जगह पिछले साल का भी अब तक नहीं मिल पाया है. ईख काश्तकार संघ, बिहार के महासचिव नागेंद्र प्रसाद सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को आवेदन भेज कर ईख काश्तकारों का बकाया ईख मूल्य भुगतान के लिए हस्तेक्षप करने की मांग की है.
उन्होंने कहा है कि पेराई सत्र 2014-15 के बकाये ईख मूल्य भुगतान के लिए मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूचि लेकर 203 करोड़ का ऋण स्वीकृत कराया था, जिसका सूद 77.22 करोड़ रुपया राज्य सरकार द्वारा किया जाना है.
गन्ना किसानों की समस्या
भुगतान में घपलेबाजी की आशंका
सरकार ने यह कदम ईख कास्तकारों के बकाया ईख मूल्य के भुगतान के लिए उठाया था, परंतु विभाग ने उन चीनी मिलों को भी इस योजना का लाभ पहुंचाया, जिसने ईख मूल्य का भुगतान कर दिया था. यानी ऋण दिलवा कर सूद की राशि सरकारी खजाने से चुकता करनी है, जिस राशि का उपयोग ईख मूल्य भुगतान मे नहीं किया गया है. यह पूरी तरह घपलेबाजी का मामला दिखता है. उन्होंने मुख्यमंत्री से उक्त मामले को अपने स्तर से देखते हुए विभागीय समीक्षा कर किसानों का समय पर भुगतान करने का आग्रह किया है.
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