घरेलू हिंसा से बच्चों को बचायें

Updated at :09 May 2016 4:31 AM
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घरेलू हिंसा से बच्चों को बचायें

आयोजन. बचपन बचाओ आंदोलन विषय पर समाहरणालय में कार्यशाला लंबित मामलों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश थाने में दर्ज होनेवाले मामलों का एक फोल्डर तैयार करें थानाध्यक्ष डुमरा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में बचपन बचाव आंदोलन विषय पर रविवार को समाहरणालय के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया […]

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आयोजन. बचपन बचाओ आंदोलन विषय पर समाहरणालय में कार्यशाला

लंबित मामलों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश
थाने में दर्ज होनेवाले मामलों का एक फोल्डर तैयार करें थानाध्यक्ष
डुमरा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में बचपन बचाव
आंदोलन विषय पर रविवार को समाहरणालय के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया़ मौके पर डीएम राजीव रौशन ने कहा, बाल मजदूरी व घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे बच्चों को सुरक्षित रखे बगैर हम राष्ट्र को सुरक्षित नहीं रख सकते़
डीएम ने किशोर न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दिशा- निर्देश दिया़
सीएस से कहा गया कि सप्ताह में एक दिन रोस्टर का निर्धारण कर संबंधित लंबित मामलों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध कराये़
समय पर जन्म प्रमाणपत्र नहीं : डीएम श्री रौशन ने थानाध्यक्षों को सुझाव दिया कि थाना में दर्ज होने वाले मामलों का एक फोल्डर तैयार करे़ उसमें उस कांड से संबंधित अभिलेखों को स्कैन कर रखें ताकि कार्यों के निष्पादन में मदद मिले व आसानी हो़ एडीजे द्वितीय अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि ससमय शिक्षा विभाग से जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाती है, इसके चलते किशोर न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन में काफी समय लग रहा है़
बगैर वारंट होंगे गिरफ्तार
किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायाधीश पंकज कुमार लाल ने किशोर न्याय अधिनियम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी़ कहा कि बच्चों की गुमशुदगी का मामला मिलते हीं संबंधित थानाध्यक्ष सबसे पहले प्राथिमकी दर्ज करेंगे़ खास कर अपहरण या मानव व्यापार में बच्चों को लगाये जाने का मामला सामने आने पर तुरंत कार्रवाई किया जाना है़ अगर उक्त दो मामले के अलावा बच्चा बगैर सूचना के भाग गया हो और बाद में वह लौट आये तो पुलिस उसके संबंध में कोर्ट को सूचना देगी और उक्त केस ड्रॉप हो जायेगा़
चार माह में करनी है जांच
प्रधान न्यायाधीश श्री लाल ने नये संशोधित अधिनियम के बारे में बताया कि कोई बच्चा 16 वर्ष का है और वह जघन्य श्रेणी का अपराध किया हो तो उसकी मानसिक व सामाजिक स्थिति की जांच के साथ पूरी कार्रवाई चार माह में पूरी कर लेनी है़ बावजूद अवधि विस्तार की जरूरत पड़ती है तो सीजेएम के आदेश से पुलिस को जांच के लिए दो माह का अतिरिक्त समय मिल सकता है़ अदिथि की परियोजना निदेशक परिणीता कुमारी ने बताया कि मुजफ्फरपुर स्थित संप्रेक्षण गृह में जिले के 22 बच्चे रह रहे है़ इन बच्चों के मामलों का अवलोकन किया जाना जरूरी है़
परिषद ने बच्चों की सूची उपलब्ध कराने को कहा़ मौके पर सीजेएम रामबिहारी, एसपी हरि प्रसाथ एस, सदर डीएसपी राजीव रंजन, डीएसपी मुख्यालय राकेश कुमार, एसडीसी कुमारिल सत्यनंदन, निवेदिता कुमारी, डा केडी पूर्वे व सत्येंद्र सिंह समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे़
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