होमगार्ड जवानों से चाकरी कराते हैं पीएचसी प्रभारी

Updated at :12 Apr 2016 5:37 AM
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होमगार्ड जवानों से चाकरी कराते हैं पीएचसी प्रभारी

अपने स्वार्थ के चलते जवानों को नहीं कर रहे विरमित पीएचसी प्रभारी के खिलाफ की जायेगी उच्चाधिकारी को रिपोर्ट सीतामढ़ी: कल तक यह सुना जाता था कि होमगार्ड जवान राइफल थाम कर ड्यूटी करने के साथ हीं साहब की हर तरह की सेवा में लगे रहते हैं. देखा भी जाता था कि होमगार्ड जवान कैसे […]

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अपने स्वार्थ के चलते जवानों को नहीं कर रहे विरमित

पीएचसी प्रभारी के खिलाफ की जायेगी उच्चाधिकारी को रिपोर्ट
सीतामढ़ी: कल तक यह सुना जाता था कि होमगार्ड जवान राइफल थाम कर ड्यूटी करने के साथ हीं साहब की हर तरह की सेवा में लगे रहते हैं. देखा भी जाता था कि होमगार्ड जवान कैसे अपनी वर्दी की शान को ताक पर रख कर ड्यूटी अवधि व उसके बाद वह सब काम करते थे जो उन्हें नहीं करना है और न हीं उनसे कराना है. हालांकि कल तक यह सब परदे के पीछे था.
अधिकारी होमगार्ड जवानों से पारिवारिक काम लेते भी थे तो इस पर कुछ कहने से कतराते थे, पर यह जान कर हैरानी होगी कि सोनबरसा पीएचसी प्रभारी डा गुरुदयाल सिंह ने स्वीकार किया है कि वे होमगार्ड के दो जवानों से निजी काम भी कराते हैं. हद तो यह कि डा सिंह ने जवानों से काम कराने की बात लिखित तौर पर दिया है. वह भी होमगार्ड डीएसपी को.
अब तक का अनोखा मामला : अक्सर यह देखा व सुना जाता है कि होमगार्ड जवान जहां पर ड्यूटी करते हैं, वहां के साहब का सब्जी लाने से लेकर और भी काम करते हैं. यह सच्चाई किसी से छुपी हुई नहीं है. यह बात अलग है कि ड्यूटी पर तैनात सभी जवानों से ड्यूटी से अलग कोई काम नहीं लिया जाता है. साहब द्वारा जवानों से कौन-कौन काम लिया जाता है, इसका उल्लेख करना उचित नहीं है, क्योंकि सच्चाई सभी को मालूम है.
नियम के पालन में बाधक : होमगार्ड डीएसपी हर्षवर्धन हाल में यहां योगदान किये हैं. उनकी कोशिश है कि नियम के तहत काम करें. यानी एक जवान को एक स्थान पर दो माह से अधिक ड्यूटी नहीं दें. इसी के तहत वे सोनबरसा पीएचसी में तैनात दो जवानों को ड्यूटी के दो माह पूरा होने पर वहां से विरमित करने के लिए उनके द्वारा पीएचसी प्रभारी को पत्र भेजा गया. नियम के पालन में डा सिंह बाधक बने हुए हैं. यानी वे होमगार्ड के दोनों जवानों क्रमश: राजीव पंजियार व कैलास राय को विरमित नहीं कर रहे हैं.
पीएचसी प्रभारी की दलील : जब होमगार्ड के डीएसपी ने बार-बार पत्र भेज जवानों को विरमित करने के लिए कहा तो डा सिंह मानवाधिकार आयोग अधिकार से शिकायत कर दिये. उनका कहना है कि उनके हाथ व पैर में लकवा मार दिया है. उन्हें चलने-फिरने में काफी तकलीफ होती है. दोनों जवानों के मदद से हीं वे चल-फिर करते है. डा सिंह का कहना है, पुलिस का परम कर्तव्य है कि गंभीर रूप से विकलांग व अस्वस्थ की सेवा करने के साथ हीं मानवाधिकार रक्षा करें. पुलिस को यह ध्यान देना है कि किसी भी व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन न हो.
होमगार्ड डीएसपी को अनोखा सुझाव
पीएचसी प्रभारी डा सिंह ने नियम के विपरीत काम करने के लिए डीएसपी श्री वर्धन को एक अनोखा सुझाव दिया है. कहा है कि जवानों के ड्यूटी के 60 दिन पूरा होने के बाद एक दिन का का ब्रेक देकर पुन: अगले 60 दिन के लिए उनके यहां प्रतिनियुक्त कर दें. डीएसपी के पत्रों को उक्त दलील के साथ पीएचसी प्रभारी द्वारा लौटा दिया जा रहा है.
कहते हैं होमगार्ड डीएसपी : होमगार्ड डीएसपी हर्षवर्धन ने बताया कि पीएचसी प्रभारी का जवाब उचित नहीं है. वे होमगार्ड जवानों से निजी काम नहीं करा सकते. डा सिंह को जवानों को विरमित कर देना चाहिए था. वैसे डा सिंह की बातों से वह शीघ्र उच्चाधिारियों से अवगत करायेंगे.
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