सदर अस्पताल का हाल-बेहाल

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सदर अस्पताल का हाल-बेहाल फोटो नंबर- 1 डेंगू वार्ड के पीछे जलजमाव, 2 ओपीडी में बने शौचालय का हाल, 3 महिला वार्ड का हाल– सदर अस्पताल का डीएनए टेस्ट सीतामढ़ी : सदर अस्पताल की व्यवस्था दिन व दिन बदतर होती जा रही है. इसका प्रतिकूल प्रभाव मरीजों पर पड़ रहा है. अस्पताल में एक तो […]

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सदर अस्पताल का हाल-बेहाल फोटो नंबर- 1 डेंगू वार्ड के पीछे जलजमाव, 2 ओपीडी में बने शौचालय का हाल, 3 महिला वार्ड का हाल– सदर अस्पताल का डीएनए टेस्ट सीतामढ़ी : सदर अस्पताल की व्यवस्था दिन व दिन बदतर होती जा रही है. इसका प्रतिकूल प्रभाव मरीजों पर पड़ रहा है. अस्पताल में एक तो सुविधाओं की कमी है और जो सुविधाएं हैं, उसका समुचित लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. प्रभात खबर ने शुक्रवार को अस्पताल का डीएनए टेस्ट किया तो बदतर व्यवस्था के कई नमूने सामने आये. — कैसे सुरक्षित रहेंगे मरीज चिकित्सक कहते हैं कि जल-जमाव वाले जगह पर हीं डेंगू मच्छर पैदा होता है. लोगों में जागरूकता पैदा किया जाता है कि घरों में व आसपास जलजमाव न होने दें. ताकि डेंगू मच्छर पैदा न हो और इसका शिकार होने से बचे रहे. यह जान कर ताज्जुब होगा कि सदर अस्पताल में कालाजार वार्ड है और इसी वार्ड में डेंगू के भी मरीज रहते हैं. इस वार्ड के ठीक पीछे जलजमाव है. यह जलजमाव वर्षों से है. इस पर अस्पताल उपाधीक्षक व अस्पताल प्रबंधक की नजर पड़ती है, लेकिन उक्त समस्या को दूर करने के बजाय दोनों हाथ पर हाथ रख बैठे हुए हैं. इसमें दो मत नहीं कि उक्त जलजमाव से डेंगू मच्छर भी पैदा होता होगा. — शाम में ओपीडी में अंधेरा ओपीडी भवन में शाम पांच बजते हीं अंधेरा छा जाता है. रौशनी की व्यवस्था नहीं होने से ऐसा हाल होता है. अधिकांश बल्ब फ्यूज है. शाम छह बजे तक ओपीडी चलता है. इस तरह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाम पांच बजे से छह बजे तक चिकित्सक किस तरह से ेमरीज को देखते होंगे. — शौचालय का नल खराब ओपीडी भवन में बने शौचालय में कई नल लगे हुए हैं. आधा दर्जन खराब है. टंकी में पानी भररा जाता ैहै, लेकिन नल के खराब रहने के चलते कुछ हीं समय में पूरा पानी बाहर आ जाता है और उस पानी का उपयोग नहीं हो पाता है. ऐसी बात नहीं कि इस समस्या की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को नहीं है, लेकिन प्रबंधन कतिपय कारणों से खराब नलों को ठीक कराने के प्रति गंभीर नहीं है. इधर, सर्जिकल वार्ड की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है. बिजली के बल्ब का बोर्ड टूटा हुआ है और तार लटक रहा है. इस तार के चलते मरीजों के साथ कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है. — बिसरा के कमरे का निर्माण नहीं अस्पताल के एक कमरे में मृतकों का बिसरा रखा हुआ है. उक्त कमरा छतदार था. गत माह आये भूकंप में छत ध्वस्त हो गया. तब से ध्वस्त हीं है. रोगी कल्याण समिति की बैठक में छत के निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ था, पर यह प्रस्ताव कागज के पन्नों पर हीं रह गया. अब तक अमल नहीं किया गया है. बारिश व धूप से बिसरा पर कोई प्रभाव भी पड़ सकता है. — सर्पदंश की दवा 30 वायल पीएचसी में अक्सर सर्पदंश की दवा का अभाव बना रहता है. सदर अस्पताल में भी यह दवा कम पड़ जाती है. वैसे फिलहाल सर्पदंश की 30 वायल दवा है. वह भी काफी कम है. जितनी संख्या में जिले से सर्पदंश के मरीज यहां आते हैं, उस अनुपात में उपलब्ध दवा एक तरह से न के बराबर है. एंटी रैबिज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. — इमरजेंसी में सिरिंज का अभाव अस्पताल के इमरजेंसी का हाल यह है कि सिरिंज भी नहीं है. मरीजों को बाहर से सिरिंज खरीद कर लाना पड़ता है. इस सच्चाई को एक कर्मी ने स्वीकार किया. रात में महिला वार्ड में भरती मरीज एएनएम व ममता पर निर्भर रहती है. कारण कि रात में महिला चिकित्सक नहीं रहती है. — दो चिकित्सक पर पूरा दारोमदार सदर अस्पताल में दो महिला चिकित्सक क्रमश: डा सुधा झा व डॉ संगीता झा हैं. बताया गया है कि डा संगीता झा ऑपरेशन नहीं करती है. वह सिर्फ ओपीडी हीं करती है. अन्य पूरा काम डा सुधा झा करती है. मात्र दो महिला चिकित्सक के होने के चलते चिकित्सक के साथ-साथ मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. यही कारण है कि रात में महिला चिकित्सक समय नहीं दे पाती है. इसी का नाजायज लाभ बिचौलिये उठाये थे. सूत्रों ने बताया कि रात में बिचौलिये मरीज का परिजन बन कर अस्पताल परिसर में इधर-उधर बैठे रहते हैं. मौका मिलते हीं मरीजों को बहला-फुसला कर बाहर लेकर चले जाते हैं. — क्या कहते हैं अधिकारी प्रयास के बावजूद अस्पताल उपाधीक्षक से संपर्क नहीं हो सका. वहीं, अस्पताल प्रबंधक शंभु शरण सिंह ने उक्त पूरे मामले पर चुप्पी साध ली. सिर्फ इतना हीं बताया कि सभी समस्याओं का समाधान शीघ्र हो जायेगा.

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