57 क्विंटल हुआ था मां के खोइछा का चावल

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57 क्विंटल हुआ था मां के खोइछा का चावलफोटो नंबर- 16 मां दुर्गा की प्रतिमा बनाता मूर्तिकार सुरसंड : प्रखंड मुख्यालय में होने वाली दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर है. मूर्तिकार प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है. पंडाल व तोरण द्वार बनाने का काम शुरू कर दिया गया है. नगर को […]

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57 क्विंटल हुआ था मां के खोइछा का चावलफोटो नंबर- 16 मां दुर्गा की प्रतिमा बनाता मूर्तिकार सुरसंड : प्रखंड मुख्यालय में होने वाली दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर है. मूर्तिकार प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है. पंडाल व तोरण द्वार बनाने का काम शुरू कर दिया गया है. नगर को स्वच्छ व सुंदर बनाये रखने की भी कवायद तेज कर दी गयी है. यहां की पूजा की विशेषता किसी से छुपी हुई नहीं है. कहा जाता है कि पूरे बिहार में सुरसंड में मां दुर्गा की पूजा अलग होती है. पूजा की विशेषता का अंदाजा इसी बात से लगायी जा सकती है कि कलश यात्रा में करीब 20 हजार कुंवारी कन्याएं शामिल होती है. विशेषता तो कई है, जिसमें एक यह भी शामिल है कि गत वर्ष मां दुर्गा की खोइछा में पड़ा चावल 57 क्विंटल हुआ था. यहां पूरी तरह वैष्णवी तरीके से पूजा की जाती है. — कलश यात्रा होती है अद्भुत प्रखंड मुख्यालय में एक हीं जगह मां दुर्गा की पूजा होती है. आसपास के गांवों में भी पूजा नहीं होती है. यही कारण है कि कलश यात्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे आते हैं. यहां तक कि सीमावर्ती नेपाल के दर्जनों गांवों से लोग आते हैं. जब नौ रथ पर मां दुर्गा के नौ रूपों की झांकी निकाली जाती है तब दृश्य अद्भुत होता है. सड़क के दोनों किनारे हजारों लोगों की भीड़ लगी रहती है. — कन्याओं पर की जाती है पुष्प वर्षा कलश यात्रा के दौरान सड़क किनारे खड़े लोग फुल लेकर तैयार रहते हैं. उनके सामने से गुजरने के दौरान वे मां के नौ रूपों के साथ हीं कुंवारी कन्याओं पर पुष्प वर्षा करते हैं. उस दौरान का माहौल एक अलग होता है. हर कोई मां की भक्ति में लीन दिखता है. सप्तमी को बेल न्योतन के साथ मां का पट खुलता है. उस दिन सुबह से हीं नहा धो कर महिला व पुरुष पहुंच मां के दर्शन के लिए खड़े रहते हैं. मां की आंख खुलते हीं जयकारे की घोष से मुख्यालय का पूरा वातावरण भक्तिमय बन जाता है. — वर्ष 1947 से होती है पूजा पूर्व सरपंच मिथिलेश राणा, पंकज पोद्दार व अन्य ने बताया कि यहां वर्ष 1947 से हीं मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है. पूजा के दौरान नगर के तीन किलोमीटर भ्रमण क्षेत्र में सड़क पर बनायी जाने वाली रंगोली भी कम आकर्षण का केंद्र नहीं होती है. बताया कि कलश यात्रा के दिन लाखों की भीड़ जगन्नाथ पुरी की याद दिलाती है.

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