न मरम्मत होती है और न व्यवस्था सुधरती है
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सोनबरसा : स्थानीय बीआरसी की मरम्मत व रंग-रोगन के लिए पिछले दो वर्ष से 50-50 हजार का आवंटन मिलता आ रहा है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि पिछले कई वर्षों से न तो मरम्मत करायी गयी है और न ही रंग-रोगन. लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब पैसे से कोई काम […]
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सोनबरसा : स्थानीय बीआरसी की मरम्मत व रंग-रोगन के लिए पिछले दो वर्ष से 50-50 हजार का आवंटन मिलता आ रहा है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि पिछले कई वर्षों से न तो मरम्मत करायी गयी है और न ही रंग-रोगन.
लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब पैसे से कोई काम हुआ ही नहीं तो दो वित्तीय वर्ष में मिले एक लाख रुपये आखिर कहां गये. इस सवाल का स्पष्ट जवाब विभागीय अधिकारी के पास भी नहीं है.
दो मंजिला है बीआरसी
बीआरसी भवन दो मंजिला है. नीचे में कार्यालय, बड़ा हॉल व आवासीय बेड लगा कमरा है. दो चापाकल है. इसमें से एक चापाकल खराब है. नौ शौचालय हैं जो चालू हालत में है. ऊपर में कंप्यूटर कक्ष, बाथरूम व अन्य कमरा है. यहां सब कुछ भगवान भरोसे है.
बीइओ व बीआरसीसी यहां नियमित आते-जाते हैं, लेकिन अधिकांश व्यवस्था बदतर है. सबसे गंभीर समस्या साफ-सफाई की है. परिसर में घास जम गया है. कमरे के अंदर की स्थिति तो ओर बुरा है.
गंदगी से पटा हुआ है. आवासीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को रात में बीआरसी में भी ठहरना पड़ता है. यहां न तो व्यवस्था ठीक-ठाक है और न ही शिक्षक ठहरते हैं.
बेड की कमी नहीं है, पर तमाम बेड अलग-अलग कमरों में मानों फेंक दी गई है. बेड कीड़े-मकोड़े से भरा पड़ा है. कुछ दिन और बेड को अगर कमरे में छोड़ दिया गया तो यह सड़ जायेगा.
अब पहले वाली बात नहीं
शिक्षक संघ के मंत्री हरि नारायण राय कहते हैं कि अब पहले वाली बात नहीं है. कभी यह बीआरसी चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था के मामले में जिला में अव्वल था.
पूर्व मंत्री डॉ रामचंद्र पूर्वे व विधायक रहे रामनरेश यादव जैसे लोग यहां ठहरा करते थे. शिकायत के बावजूद वरीय अधिकारी नहीं सुनते हैं.
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