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आवारा कुत्तों का खौफ, सीतामढ़ी में हर माह 1500 लोग बन रहे शिकार, प्रशासन बेखबर

सीतामढ़ी में अगर सुबह घर से निकलते समय लोगों के मन में किसी अपराधी का डर नहीं होता, तो वह डर आवारा कुत्तों का जरूर होता है. शहर से लेकर गांव तक कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि कब, कहां और किसे शिकार बना लें, कहना मुश्किल हो गया है. हालात इतने भयावह हैं कि हर दिन दर्जनों लोग कुत्तों के काटने से जख्मी हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार प्रशासन अब तक ठोस कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है.

सीतामढ़ी. जिले में प्रतिवर्ष करीब 12 हजार लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं, जबकि प्रतिमाह औसतन 1000 से अधिक मामले सामने आते हैं. दिसंबर 2025 में ही 1810 लोग सिर्फ सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे. अगर पीएचसी, सीएचसी और नेपाल में इलाज कराने वाले मरीजों का आंकड़ा जोड़ा जाए, तो संख्या और भी भयावह हो जाती है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन 6 से 7 नए मरीज कुत्ता काटने के कारण अस्पताल पहुंचते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी केवल कागजी कार्रवाई

सदर अस्पताल की रिपोर्ट बताती है कि जुलाई 2025 में 1373, अगस्त में 1194, सितंबर में 1099, अक्टूबर में 1220, नवंबर में 1383 और दिसंबर में 1810 मरीजों का इलाज किया गया. यानी जिले में हर माह औसतन 1500 लोग कुत्तों के हमले से जख्मी हो रहे हैं. इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है.

पैदल चलना लोगों के लिए जोखिम भरा

शहरवासी दशकों से इस समस्या से जूझ रहे हैं. पैदल चलना लोगों के लिए जोखिम भरा हो गया है. कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस, नसबंदी और टीकाकरण जैसी योजनाएं अब तक फाइलों में ही कैद हैं. उप नगर आयुक्त कुलदीप सिन्हा और सिटी मैनेजर अमरजीत कुमार का कहना है कि जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी.

भोजन की कमी और प्रताड़ना कुत्तों को आक्रामक बनाती

इस बीच जिला पशुपालन अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार झा ने लोगों से अपील की है कि कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार न करें. उन्होंने कहा कि भोजन की कमी और प्रताड़ना कुत्तों को आक्रामक बनाती है. जरूरत है संतुलित और संवेदनशील रवैये के साथ प्रशासनिक हस्तक्षेप की, ताकि यह बढ़ता आतंक थम सके.

कुत्ता काटने पर सबसे पहले तुरंत ये कदम उठाएं

घाव को तुरंत धोएं.

कटे या खरोंचे गए स्थान को बहते साफ पानी और साबुन से कम से कम 10–15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं. यह सबसे ज़रूरी कदम है, इससे वायरस का खतरा काफी कम होता है.

एंटीसेप्टिक लगाएं.

धोने के बाद घाव पर पॉविडोन आयोडीन / बेटाडीन / एंटीसेप्टिक लगाएं.

घाव को न बांधें . टाइट पट्टी न करें और न ही मिर्च, हल्दी, तेल या देसी नुस्खे लगाएं.

तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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