बरात में साधु-संतों का होगा भव्य स्वागत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Nov 2019 11:41 PM
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पहली बार दशरथ जी अपने चारों पुत्रों के साथ पुनौरा धाम में करेंगे रात्रि विश्राम सीतामढ़ी : श्री सीता-राम विवाहोत्सव पर बीते 21 नवंबर को अयोध्या धाम से मिथिला धाम के लिए चली बरात आज जगज्जननी मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी पहुंचेगी. विवाह बारात यात्रा आज शाम करीब 7.00 बजे शहर पहुंचेगी. बरातियों का मिथिला […]
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पहली बार दशरथ जी अपने चारों पुत्रों के साथ पुनौरा धाम में करेंगे रात्रि विश्राम
सीतामढ़ी : श्री सीता-राम विवाहोत्सव पर बीते 21 नवंबर को अयोध्या धाम से मिथिला धाम के लिए चली बरात आज जगज्जननी मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी पहुंचेगी.
विवाह बारात यात्रा आज शाम करीब 7.00 बजे शहर पहुंचेगी. बरातियों का मिथिला की पारंपारिक रिति-रिवाजों के अनुसार स्वागत करने को लेकर भव्य तैयारियां की गयी है. बरात में शामिल साधु-संतों के स्वागत के लिए शहर को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है. शनिवार को जगह-जगह गेट एवं पंडाल का निर्माण कराया जा रहा था. शहर की युवतियों एवं महिलाओं द्वारा जगह-जगह मनमोहक रंगोलियां बनाया जा रहा है.
महिलाएं आतिशबाजियों के साथ बारातियों के स्वागत के लिए पूरे उत्साह के साथ तैयार हैं. इस संबंध में श्री जानकी जन्मोत्सव आयोजन समिति के तत्वाधान में शनिवार को जानकी मंदिर परिसर में शनिवार को पत्रकारों को जानकारी दी. समिति के संयोजक नितेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि गत 21 नवंबर को अयोध्या कारसेवक पुरम् से बरात निकली थी, जो बक्सर, पाटलिपुत्र, पटना, मुजफ्फरपुर व जिले के रून्नीसैदपुर होते हुए जानकी प्राकट्य स्थली जानकी मंदिर पहुंचेगी. बारात में करीब 200 साधु-संत शामिल हो रहे हैं. इसमें दो रथ पर सवार राम-लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न, दशरथ एवं उनके गुरु वशिष्ठ की भव्य झांकी होगी. जगह-जगह तोरण द्वार बनाया गया है. पुष्प वर्षा व आतिशबाजियों के साथ बारातियों का प्रेम भाव से स्वागत किया जाएगा.
मिथिला परंपरा के अनुसार बरातियों का होगा स्वागत : आयोजन समिति ने शहरवासियों से श्री राम-जानकी विवाह बारात के स्वागत के लिए अपने घरों एवं दुकानों के सामने रंगोली, तोरण द्वार व फूलों से सजाने का आग्रह किया है. चुंकी, यह वर्ष श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के कारण विशेष महत्व रखता है, इसलिए बरातियों के आगमन पर पुष्पमाला पहनाकर एवं पुष्प वर्षा कर मिथिला की परंपरा के अनुसार उनका स्वागत करने, नगर को साफ-सुथरा व स्वच्छ बनाए रखने, बरात के आगमन पर पूरे नगर में दीपोत्सव मनाने व आतिशबाजियां करने के साथ ही अपने-अपने मकान व दुकान के सामने शंख, घड़ी, घंटाल बजाकर बरात में शामिल साधु-संतों का स्वागत करने का अनुरोध किया गया है. साथ ही बारातियों के लिए आयोजित स्वागत समारोह में मां जानकी प्राकट्य स्थल श्री जानकी मंदिर में सपरिवार पहुंचकर समारोह में सभी सहभागी बनने की अपील की गई.
बरातियों के साथ हंसी-ठिठोली को ले जिलेवासी उत्साहित : बता दें कि मिथिलांचल में रामायण काल से ही बारातियों व वधू पक्ष के लोगों के बीच हंसी-मजाक की परंपरा रही है जो आज भी जारी है. गत वर्ष भी अयोध्या से चलकर जानकी जन्मस्थली सीतामढ़ी पहुंचने पर बारात में शामिल साधु-संतों व शहरवासियों के बीच खूब हंसी-ठिठोली हुई थी. संत मुठिया बाबा ने बताया कि श्री राम हमारे भगवान भी हैं और हमारे दामाद भी. मिथिला वासियों से श्री राम का पारिवारिक संबंध है, इस नाते शहरवासी पिछली बार भी बारातियों के साथ खूब हंसी-मजाक किये थे. इस बार भी श्रद्धालु बरातियों के साथ पारंपरिक तरीके से हंसी-ठिठोली के लिए बेहद उत्साहित हैं.
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि बरातियों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था पुनौरा धाम में की गई है. सुबह में बरात जनकपुर के लिए प्रस्थान करेगा.
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