शाम चार बजे तक बंद रहीं शहर की दुकानें

Updated at : 02 Jul 2019 2:35 AM (IST)
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शाम चार बजे तक बंद रहीं शहर की दुकानें

सीतामढ़ी : राज्य में फार्मासिस्टों की घोर कमी, राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन द्वारा खुदरा दवा दुकानों को धड्डल्ले से लाइसेंस निर्गत करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर जिले भर के दवा व्यवसायी सोमवार को आंदोलित हो गये. फार्मासिस्टों की कमी पर नाराजगी जताते हुए दवा दुकानदारों ने जिला मुख्यालय डुमरा स्थित आंबेडकर स्थल पर धरना-प्रदर्शन […]

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सीतामढ़ी : राज्य में फार्मासिस्टों की घोर कमी, राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन द्वारा खुदरा दवा दुकानों को धड्डल्ले से लाइसेंस निर्गत करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर जिले भर के दवा व्यवसायी सोमवार को आंदोलित हो गये.

फार्मासिस्टों की कमी पर नाराजगी जताते हुए दवा दुकानदारों ने जिला मुख्यालय डुमरा स्थित आंबेडकर स्थल पर धरना-प्रदर्शन किया. इसका नेतृत्व सीतामढ़ी जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह कर रहे थे. इस दौरान दोपहर चार बजे तक जिले भर की तमाम दवा की दुकानें बंद रही. आंदोलित दवा व्यवसायियों ने शहर की प्रमुख दवा मंडी सेंट्रल मार्केट व नेशनल मार्केट के पास एकत्रित होकर विरोध जताया.
शहर के प्रमुख दवा मंडी के अलावा किरण चौक, अस्पताल रोड, पानी टंकी रोड, मेन रोड, पार्क रोड समेत अन्य जगहों पर स्थित दवा दुकानों में आज दिनभर ताला लटका रहा. दवा व्यवसायियों के आंदोलन का असर निजी क्लिनिक पर भी देखा गया. धरना-प्रदर्शन के बाद एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला तथा ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में आंदोलन की वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया. श्री सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा निर्गत लाइसेंस के आधार पर हजारों पढ़े-लिखे बेरोजगार नवयुवक किसी तरह पूंजी की व्यवस्था करके दवा दुकानें चला रहे हैं.
केंद्रीय नियमानुसार फार्मेसी एक्ट के तहत खुदरा दवा दुकानों में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता है, लेकिन बिहार में दवा दुकानों की अपेक्षा फार्मासिस्ट की उपलब्धता की आरंभ से हीं घोर कमी है. इस कमी को दूर करने के लिए हमलोगों ने लगभग 1990 से हीं अब तक अपने संगठन के माध्यम से केंद्र एवं बिहार सरकार के लगभग सभी सरकारों से कई बार लिखित एवं मिलकर आग्रह कर चुके हैं.
बिहार में इसका कोई ठोस समाधान नहीं हुआ. न हीं फार्मेसी संस्थान को विकसित किया गया. धरना व प्रदर्शन में एसोसिएशन के सचिव राजकुमार, कोषाध्यक्ष छेदीलाल अग्रवाल, प्रमोद खेतान, गोपाल कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार मित्तल समेत बड़ी संख्या में दवा व्यवसायी मौजूद थे.दवा के लिए भटकते रहे मरीज व परिजन: शहर में दवा दुकानदारों के आंदोलन का कुछ घंटों के लिए हीं सही, लेकिन पूरा-पूरा असर देखा गया है.
सुबह से हीं दुकानें बंद रहने पर लोग असहज महसूस कर रहे थे. कई लोग दवा दुकान बंद किये जाने का माजरा समझने की कोशिश भी कर रहे थे. अस्पताल रोड से लेकर मेन रोड तक की दवा दुकानों में ताला लटका था. क्लिनिक की तरफ रुख कर रहे मरीज व परिजन इलाज के बाद दवा के लिए इधर-उधर भटकते रहे.
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