डीडब्ल्यूओ हत्याकांड : कहीं गवाह मुकरे न, पुलिस कर रही वैज्ञानिक अनुसंधान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Jul 2018 3:51 AM
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बबलू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रे सीतामढ़ी/पटना : जिला कल्याण पदाधिकारी (डीडब्ल्यूओ) हत्याकांड की गुत्थी पूरी तरह सुलझाने के लिए पुलिस शिक्षक मो अली उर्फ बबलू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रे (प्रार्थना पत्र) दे चुकी है. इधर, पटना के बेउर जेल में बंद साइको किलर रामजी राय […]
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बबलू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रे
सीतामढ़ी/पटना : जिला कल्याण पदाधिकारी (डीडब्ल्यूओ) हत्याकांड की गुत्थी पूरी तरह सुलझाने के लिए पुलिस शिक्षक मो अली उर्फ बबलू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रे (प्रार्थना पत्र) दे चुकी है. इधर, पटना के बेउर जेल में बंद साइको किलर रामजी राय को भी रिमांड पर लेने के लिए जिला पुलिस न्यायिक में प्रक्रिया पूरी कर चुकी है.
संभावना व्यक्त की जा रही है कि बबलू व रामजी से पूछताछ के बाद इस हत्याकांड के कारणों का खुलासा हो जायेगा. हालांकि चर्चा है कि जिला कल्याण कार्यालय के गबन-घोटाले में हत्या का तार छुपा हुआ है. जांच में प्रथम दृष्टया गबन-घोटाले का मामला सामने आया भी है.
कॉल डिटेल में सोहन व बबलू के खिलाफ मिले साक्ष्य : इधर, हत्याकांड के बाद जिला पुलिस आरोपितों को सजा दिलाने के प्रति गंभीर दिख रही है.
कारण है कि अब तक के ज्यादातर आपराधिक मामलों में पुलिस को यह देखने को मिला है कि अदालत में गवाही देते वक्त गवाह अपना बयान डर या कतिपय कारणों से बदल देते हैं. इस कारण पुलिस वैज्ञानिक अनुसंधान कर रही है. वैज्ञानिक अनुसंधान के क्रम में पुलिस ने इसमें संलिप्त मो अली उर्फ बबलू, रामजी राय व सोहन ठाकुर समेत अन्य के खिलाफ साक्ष्य जुटाना आरंभ कर दिया है. इस कड़ी में पुलिस ने आरोपितों के कॉल डिटेल को खंगाला. तब पाया कि घटना की साजिश रचने व अंजाम देने वाले का कनेक्शन एक-दूसरे से बना हुआ था.
डीडब्ल्यूओ की हत्या की साजिश के बाद व पूर्व से आरोपितों की लंबी बातचीत आपस में एक-दूसरे से होती रही है. इससे शिक्षक बबलू भी वंचित नहीं है. सूत्रों पर भरोसा करें, तो इस हत्या की सुपारी देने वाले बबलू व सोहन में लगातार बातचीत होती रही है. कुछ इसी तरह के वैज्ञानिक अनुसंधान के क्रम में पुलिस ने अब तक पर्याप्त साक्ष्य जुटाया है. जिसे अदालत में पेश करने के बाद आरोपितों को अपनी गर्दन बचाना आसान नहीं होगा.
बोले अधिकारी
आपराधिक मामलों को विराम देने के लिए अपराधियों को सजा मिलना अनिवार्य है. उन्हें सजा दिलाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों को आगे आना चाहिए.
प्रत्यक्षदर्शियों को आगे आकर अपने जवाबदेह नागरिक का कर्तव्य अदा करना चाहिए. पुलिस गवाहों की सुरक्षा के लिए कृत संकल्पित है. हालांकि इस हत्याकांड में आरोपितों के खिलाफ पुलिस वैज्ञानिक अनुसंधान कर साक्ष्य जुटा रही है. आरोपितों को सजा मिलना तय माना जा रहा है.
मुकेश चंद्र कुंवर, सर्कल इंस्पेक्टर, नगर
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