बैरगनिया बीइओ के खिलाफ सरकार को रिपोर्ट

Published at :11 May 2018 5:23 AM (IST)
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बैरगनिया बीइओ के खिलाफ सरकार को रिपोर्ट

सीतामढ़ी : डुमरा एमओ राजेश रंजन आखिर गिरफ्त में आ ही गये. काफी दिनों से बच रहे थे, पर वह दिन आ ही गया, जब पुलिस के हत्थे चढ़ गये. पूर्व में हर कोई यह कयास लगाता था कि जिस तरह से एमओ नशा में रहते है, किसी दिन उन्हें महंगा पड़ेगा. ऐसा हो भी […]

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सीतामढ़ी : डुमरा एमओ राजेश रंजन आखिर गिरफ्त में आ ही गये. काफी दिनों से बच रहे थे, पर वह दिन आ ही गया, जब पुलिस के हत्थे चढ़ गये.

पूर्व में हर कोई यह कयास लगाता था कि जिस तरह से एमओ नशा में रहते है, किसी दिन उन्हें महंगा पड़ेगा. ऐसा हो भी गया. नशा के चलते अब उनकी नौकरी भी दांव पर लग गयी है. वैसे वह समय बतायेगा कि श्री रंजन के खिलाफ कौन-कौन सी कार्रवाई होती है. बहरहाल, एमओ की गिरफ्तारी से प्रशासन पर एक बड़ा दाग लगा है.
एमओ की रही बड़ी दुःसाहस: जानकारों का मानना है कि शराब के नशे में डीएम व अन्य अधिकारियों के पास जाना एमओ का दुःसाहस ही कहा जायेगा.
चर्चा है कि डीएम की एमओ पर नजर पड़ गयी और उनके निर्देश पर सदर एसडीओ ने पुलिस को सूचना दी और तुरंत पहुंची पुलिस ने एमओ को समाहरणालय के मुख्य द्वार पर दबोच लिया. उन्हें थाना में रात भर रखा गया. कारण कि शाम में गिरफ्तारी की गयी थी. गुरुवार को दो चौकीदार एक बाइक पर एमओ को बीच में बैठा कर कोर्ट में ले गये.
अधिकारी ही बचाते आ रहे थे एमओ को !: पूरे दिन भर यह चर्चा का विषय बना रहा कि एमओ को अधिकारियों द्वारा बचाव किया जाता रहा है. श्री रंजन वर्षों से शराब के आदि थे. यह बात हर किसी को मालूम थी.
कार्यालय हो या वरीय अधिकारियों के पास किसी काम से जाने की, वे हमेशा नशे में ही रहते थे, लेकिन एक अधिकारी होने के नाते एवं नौकरी का सवाल होने के कारण कोई पुलिस से शिकायत नहीं करते थे. यही कारण रहा कि उनकी हिम्मत बढ़ती गयी और अन्य दिनों की तरह बुधवार को भी नशे में वरीय अधिकारियों के सामने चले आये थे. एमओ श्री रंजन शायद यह भूल गये थे कि नये डीएम योगदान कर चुके है.
बचाव में थाना पर पहुंची थी बड़ी फ़ौज: डीलरों, मुखियाओं व सफेदपोशों के बीच एमओ की गहरी पैठ थी. इनलोगों के बीच श्री रंजन का क्या इमेज था, का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके बचाव में पिछले 15 घंटे से एक बड़ी फ़ौज थाना पर व उसके आस-पास डेरा गिराये हुए था. खबर मिली है कि उक्त लोगों द्वारा मामले को मैनेज करने के लिए पुलिस पर काफी दबाव बनाया गया.
मोटी रकम तक की पेशकश की गयी, लेकिन थानाध्यक्ष विकास कुमार ने किसी की नहीं सुनी है और एमओ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
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