तीन हजार रुपये मांगी िरश्वत कथित रिश्वत नहीं देने का संतोष को रहेगा मलाल

Published at :12 Apr 2018 5:19 AM (IST)
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तीन हजार रुपये मांगी िरश्वत कथित रिश्वत नहीं देने का संतोष  को रहेगा मलाल

सीतामढ़ी : पुलिस की कार्यशैली पर बराबर सवाल उठाये जाते रहे है. खासकर अवैध वसूली को लेकर. हाल में निगरानी विभाग ने भी एक रिपोर्ट जारी कर सबसे अधिक भ्रष्टाचार पुलिस विभाग में बताया था. यह रिपोर्ट रिश्वतखोरी में पकड़े गये पुलिस कर्मियों के आंकड़े के आधार पर जारी किया गया था. तब यह माना […]

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सीतामढ़ी : पुलिस की कार्यशैली पर बराबर सवाल उठाये जाते रहे है. खासकर अवैध वसूली को लेकर. हाल में निगरानी विभाग ने भी एक रिपोर्ट जारी कर सबसे अधिक भ्रष्टाचार पुलिस विभाग में बताया था.

यह रिपोर्ट रिश्वतखोरी में पकड़े गये पुलिस कर्मियों के आंकड़े के आधार पर जारी किया गया था. तब यह माना गया था कि पुलिस विभाग की इस तरह की शिकायतों में कमी आयेगी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है. ताजा मामला चोरौत उपथाना से का है. मामला यह कि कथित तौर पर रिश्वत नहीं देने के कारण एक व्यक्ति के पासपोर्ट से संबंधित आवेदन की जांच किये बगैर लौटा दिया गया. आवेदक ने पूरे मामले से लिखित तौर पर एसपी को अवगत कराया है.
हाथ जोड़ा, फिर भी निराशा: जमादार श्री सिंह ने वेरीफिकेशन के नाम पर कथित तौर पर संतोष से तीन हजार रुपये का डिमांड किया. उसने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कह दारोगाजी से विनती की, पर वे अपनी जिद्द पर अड़े रहे. तब वह समाजसेवी रंजीत कुमार से मिला. दूसरे दिन थानाध्यक्ष द्वारा उसे जानकारी दी गयी कि उसके आवेदन को पुपरी थाना भेज दिया गया है. सात अप्रैल को पुपरी थाना से संपर्क करने पर उसे जानकारी मिली की आवेदन को जिला में वापस कर दिया गया है. यह सुनते ही संतोष पर मानो पहाड़ टूट कर गिर गया.
तब तक हो चुका था काफी विलंब
तब वह रंजीत को लेकर भागा-भागा पुपरी एसडीपीओ के पास पहुंचा. साथ में रंजीत कुमार भी थे. एसडीपीओ ने पुपरी थानाध्यक्ष को फोन पर मामले की जांच करने को कहा. जब वह थाना आया तो पता चला कि यहां से आवेदन जिला को लौटा दिया गया है. थानाध्यक्ष ने संतोष के साथ एक चौकीदार को आवेदन लाने के लिए जिला में भेजा. तब तक काफी विलंब हो चुका था. जिला में संतोष को खबर मिली कि आवेदन को पटना कार्यालय वापस कर दिया गया है. अब कुछ नहीं होगा. फिर से आवेदन करना होगा. संतोष ने बताया कि काश ! दारोगाजी की मांग पूरी कर देता तो बन जाता पासपोर्ट.
एसपी ने थानाध्यक्ष को लगायी फटकार: वहां से संतोष को लेकर रंजीत एसपी के कार्यालय पहुंचे. संयोग से क्राइम मीटिंग में पुपरी व चोरौत दोनों थानाध्यक्ष पहुंचे थे. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने दोनों थानाध्यक्ष को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण की मांग की. संतोष ने बताया कि एसपी के व्यवहार को देख कर वह अपना दर्द कुछ पल के लिए भूल गया. काश जिले के थानाध्यक्ष भी एसपी की तरह दूसरे के दर्द को समझ सकते.
क्या है पूरा मामला: मामला यह है कि पुपरी थाना के डुमहारपट्टी के संतोष कुमार ने पासपोर्ट के लिए पटना कार्यालय में आवेदन दिया था. वहां से जांच को एसपी को आवेदन आया. जिला से आवेदन मिलने के बाद पुपरी थाना ने उसे चोरौत उपथाना भेज दिया. थानाध्यक्ष विकास कुमार ने संतोष को कागजात व दो गवाह के साथ थाना पर बुलाया. वह 30 मार्च 18 को थाना पर पहुंचा. उसे जमादार विनोद कुमार सिंह से मिलने को कहा गया.
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