जांच के बाद लिपिक के चार वेतनवृद्धि पर लगायी गयी रोक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Dec 2017 4:50 AM (IST)
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आरोपों की पुपरी एसडीओ ने की थी जांच अनुसूचित जाति आयोग में पहुंच गया था मामला सीतामढ़ी : सुरसंड सीओ के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगा कर उन्हें परेशान करने की नियत पाले लिपिक रामप्रताप पासवान को काफी महंगा पड़ा है. जांच रिपोर्ट व कार्रवाई की अनुशंसा के आलोक में डीएम राजीव रौशन ने उक्त लिपिक […]
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आरोपों की पुपरी एसडीओ ने की थी जांच
अनुसूचित जाति आयोग में पहुंच गया था मामला
सीतामढ़ी : सुरसंड सीओ के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगा कर उन्हें परेशान करने की नियत पाले लिपिक रामप्रताप पासवान को काफी महंगा पड़ा है. जांच रिपोर्ट व कार्रवाई की अनुशंसा के आलोक में डीएम राजीव रौशन ने उक्त लिपिक के चार वेतनवृद्धि पर रोक लगा दिया है. आरोप गलत साबित होने के बाद श्री पासवान के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चली. उसके बाद उन्हें उक्त सजा मिली है. काफी समय बाद किसी कर्मी के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई का मामला सामने आया है.
किस-किस आरोप में लिपिक दोषी
जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि लिपिक श्री पासवान द्वारा अधिकारी पर गलत आरोप लगाया गया. उनके स्तर से प्रभार का आदान-प्रदान नहीं किया गया. वहीं, उनके द्वारा अधिकारियों के आदेश का उल्लंघन किया गया. उनकी उक्त कार्यशैली को सरकारी सेवा आचार नियमावली का उल्लंघन मान संचयात्मक प्रभाव से आगामी चार वेतनवृद्धि पर रोक लगा दिया गया है.
क्या है पूरा मामला
बताया गया है कि श्री पासवान ने तरह-तरह का आरोप लगाकर सीओ की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग, पटना से की थी. आयोग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने डीएम से मामले की जांच करा रिपोर्ट की मांग की थी. पुपरी एसडीओ को जांच सौंपी गयी. उन्होंने जांच में आरोपों को निराधार पाया और डीएम को भेजे रिपोर्ट में लिपिक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की अनुशंसा किया. तब प्रपत्र ‘क’ में आरोप का गठन किया गया. फरवरी 2017 में विभागीय कार्रवाई शुरू हुई. श्री पासवान से दूसरी बार स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसमें उन्होंने संचालन पदाधिकारी सह एडीएम (जांच) को बताया कि दाखिल खारिज के अभिलेख का प्रभार लेने में डाटा इंट्री ऑपरेटर प्रवीण कुमार आनाकानी कर रहे थे और काटे गये उपस्थिति पर जबरन हस्ताक्षर दर्ज करने के संबंध में प्रभार का आदान-प्रदान नहीं होने के कारण दुर्भावना से ग्रसित होकर प्रधान सहायक द्वारा उपस्थिति पर क्रॉस किया गया. श्री पासवान ने यह स्वीकार किया कि अंतिम वेतन प्रमाण पत्र निर्गत नहीं होने एवं आर्थिक तंगी के कारण भावावेश में गलती हो गयी. जांच अधिकारी का कहना था, अगर प्रभार नहीं लेने की जहां तक बात थी तो लिपिक को उसकी शिकायत सीओ से करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
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