सालों से चल रही वर्चस्व की जंग

Updated at : 24 Dec 2016 7:46 AM (IST)
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सालों से चल रही वर्चस्व की जंग

7.30 लाख में हुई थी मटोखर दह की बंदोबस्ती शेखपरा : मटोखर दह के बड़े जलकर की बंदोबस्ती राज्य सरकार के द्वारा पीपीपी मोड के तहत कराया जा रहा है. इस नई व्यवस्था में पहली बार दह की बंदोबस्ती 7.3 लाख रुपये का राजस्व जमा कराने के बाद किया गया है. हालांकि इस बंदोबस्ती को […]

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7.30 लाख में हुई थी मटोखर दह की बंदोबस्ती
शेखपरा : मटोखर दह के बड़े जलकर की बंदोबस्ती राज्य सरकार के द्वारा पीपीपी मोड के तहत कराया जा रहा है. इस नई व्यवस्था में पहली बार दह की बंदोबस्ती 7.3 लाख रुपये का राजस्व जमा कराने के बाद किया गया है.
हालांकि इस बंदोबस्ती को लेकर पहले से कायम वर्चस्व की लड़ाई में कई तरह के दावे ठोके गये हैं. लेकिन वर्तमान स्थिति ने यह दावा पट्टेदार अरुण चौहान को बताया जा रहा है. इस विवाद को लेकर हुए गोलीबारी और मारपीट की घटना ने जहां पुलिस प्रशासन के समक्ष एक बार फिर कड़ी चुनौती खड़ा किया है. वहीं दूसरी ओर महीनों चलने वाले मछली निकासी कार्य के लिए लाये गये मल्लाहों में भी दहशत का माहौल है. मटोखर दह की बंदोबस्ती के विभाग ने इसके पूर्व भी दोनों पक्षों के द्वारा जीरा डालने की कार्यवाही की गई थी. लेकिन विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश नहीं होने के कारण कोई विपक्ष मछली निष्कासित नहीं कर सका था. ऐसी स्थिति में मछली निकासी को लेकर ठने वर्चस्व की लड़ाई में एक बार फिर दह के बंदोबस्ती और मत्स्य पालन की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं.
मल्लाहों में दहशत : गुरुवार की मध्यरात्रि दबंगों के द्वारा गोलीबारी और मारपीट की घटना ने मल्लाहों की टीम को भी थर्रा कर रख दिया है. हालांकि इस विवाद के कारण क्षेत्र में तनाव तो है ही और आम लोगों में भी असुरक्षा का ख्वाब साफ दिख रहा है. इस घटना पर अगर नजर डाले तो दबंगों ने बेगूसराय जिले के गेहूंनी निवासी रामदेव साहनी, रघुनंदन साहनी,शशि विंद, विनोद साहनी, उत्तम साहनी,फदिरा वाद निवासी मधुसूदन साहनी औजधो निवासी रंजीत साहनी, फदीराबाद निवासी अमीन खान, महेशपुर निवासी जीवन साहनी समेत अन्य लोग भी चोटिल हुए इस घटना के बाद महिलाओं ने मछली मारने के लिए प्रशासनिक महकमा से सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की है.क्या है बंदोबस्ती की प्रक्रिया : मटोखर का नया मूल्यांकन अब पीपीपी मोड के तहत किया गया है.
इस मोड में एक किलोमीटर लंबा एवं आधा किलो मीटर चौड़े इस जलखर को बीज प्रक्षेत्र का दर्जा प्राप्त है. इस दह में हैचरी का निर्माण कर मत्स्य बीज का उत्पादन किया जाना है. हैचरी निर्माण के लिए इस दह की बंदोबस्ती पूर्व की तुलना में कई गुना अधिक राजस्व 7.3लाख रुपये प्रति वर्ष शुल्क का भुगतान कर बंदोबस्ती दी जाती है. इस दह की बंदोबस्ती बिहार सरकार के द्वारा की जाती है.
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