सर, यूपी में बंधक बने पंद्रह मासूमों को छुड़वा दो

Updated at : 02 Oct 2016 3:26 AM (IST)
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सर, यूपी में बंधक बने पंद्रह मासूमों को छुड़वा दो

दास्तान. चार माह बाद घर लौटे सचिन ने किया खुलासा एसडीपीओ ने कार्रवाई का आश्वासन दिया शेखपुरा : चार माह बाद अपने घर पहुचे आंठवी कक्षा के सचिन ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो नाबालिगों को बंधक बना कर लोहा गलाने की फैक्ट्री में अमानवीय तरीके से काम करवा रहा है. रोंगटे […]

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दास्तान. चार माह बाद घर लौटे सचिन ने किया खुलासा

एसडीपीओ ने कार्रवाई का आश्वासन दिया
शेखपुरा : चार माह बाद अपने घर पहुचे आंठवी कक्षा के सचिन ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो नाबालिगों को बंधक बना कर लोहा गलाने की फैक्ट्री में अमानवीय तरीके से काम करवा रहा है. रोंगटे खड़े करने वाले चार महीने की दास्तान सुनाने वाले पीड़ित सचिन तो खुद जान जोखिम में डाल कर भागमे में कामयाब रहा. मासूमों पर कहर बरपाने वाले दरिंदों का खौफ अभी भी सचिन के चेहरे पर साफ दिखायी दे रहा है. शेखपुरा शहर के खांडपर मोहल्ले के राज मजदूर परमेश्वर प्रसाद के पुत्र सचिन पिछले 8 जून को अपने घर से भाग गया था. लेकिन जैसे ही लखीसराय स्टेशन पहुंचा तो कुछ देर में ही एक दाढ़ी वाले अधेड़ ने उसे फुसला कर मादक पदार्थ खिला दिया.
उसे जब वापस होश आया तब अपने आप को एक दो मंजिले मकान जहां लोहा गला कर गोलाकार प्लेट तैयार किया जाता था.इस प्लेट में यूपी लिखे जाने की एक मात्र पहचान ही छात्र के पास है.इस फैक्ट्री में इसी उम्र के करीब पंद्रह और भी बच्चे बंधक बने है.फक्ट्री में सुबह सात बजे से लेकर रात दस बजे तक काम लिया जाता था.लेकिन खाने में सिर्फ दाल और चावल दो वक्त दिया जाता था.मासूम बच्चों को काम करने के लिए बेरहमी से पिटाई तो की जाती थी.साथ ही एक दूसरे से संपर्क भी नहीं होने दिया जाता था.सचिन ने बताया कि वह करीब तीन माह पहले भी भागने की कोशिश की तब बेरहमी से पिटाई की गयी .
बंद कोठरी में कभी धुप नहीं देखने वाले मासूम ने दो मंजिले मकान के वेंटिलेटर से छलांग लगा दी. इस दौरान पीड़ित का हैवानों ने पीछा भी किया. लेकिन अंजान जगह में मासूम सचिन अगली सुबह की एक गंदे शौचालय छिपा रहा. आखिरकार वह एक ऐसे स्थान पर पहुंचा जहां एक ट्रेन रुकी थी. करीब चार घंटे की सफर के बाद वह बांस बरेली स्टेशन पहुंचा और एक राहगीर के मोबाइल से पहलीवार अपने परिजन से संपर्क साधा. इसके बाद वह एक ऐसे व्यक्ति के मोबाइल से अपने परिजनों को फोन किया जो दानापुर पटना आ रहे थे.
आखिरकार पीड़ित सचिन की मुलाकात पटना में ही परिजनों से हुई. पीड़ित परिजनों ने आने पुत्र की आजादी के बाद उन पंद्रह मासूमों को आजाद कराने की मांग सरकार से की है जो आज भी बंधक बने हैं.एसडीपीओ अमित शरण ने बताया कि उस मामले में पीड़ित का बयान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
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