डॉक्टर ने जीवित नवजात को मृत घोषित कर बाहर निकाला,आक्रोश

Updated at : 28 Aug 2016 1:06 AM (IST)
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डॉक्टर ने जीवित नवजात को मृत घोषित कर बाहर निकाला,आक्रोश

सिजेरियन की जरूरत थी 18 घंटे तक प्रसूता को देखने नहीं पहुंचे कोई चिकित्सक जन्म के कुछ घंटे बाद ही मृत हुआ नवजात शेखपुरा : सदर अस्पताल में संस्थागत प्रसव के नाम पर जो कुछ हो रहा वह एक आम इनसान का रोंगटे खड़ा करने के लिए काफी है.अपने कोख में पोस्ट मैच्योर बच्चे को […]

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सिजेरियन की जरूरत थी 18 घंटे तक प्रसूता को देखने नहीं पहुंचे कोई चिकित्सक

जन्म के कुछ घंटे बाद ही मृत हुआ नवजात
शेखपुरा : सदर अस्पताल में संस्थागत प्रसव के नाम पर जो कुछ हो रहा वह एक आम इनसान का रोंगटे खड़ा करने के लिए काफी है.अपने कोख में पोस्ट मैच्योर बच्चे को जन्म देने आयी एक महिला को प्रसव के लिए सिजेरियन की आवश्यकता थी. लेकिन जब 18घंटे तक कोई चिकित्सक महिला को देखने नहीं पहुंचे तब एएन एम और ममता ने सामान्य प्रसव कराया. लेकिन बच्चे की जान नहीं बचायी जा सकी. अरियरी के हुसैनाबाद गांव निवासी अजीत महतो की पत्नी सीमा कुमारी को पहले प्रसव के लिए सदर अस्पताल में शुक्रवार की रात 09:30 बजे भरती कराया गया था.
परिजनों ने आरोप लगाया कि 11माह का प्रसव के दौरान भारी लापरवाही के कारण गभीर अवस्था में नवजात को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया.नवजात को मृत घोषित कर एसएनसीयू से चिकित्सक ने बाहर निकाल दिया.इसके बाद जब परिजन नवजात को निजी अस्पताल में ले जाया गया तब उसे जीवित बताया गया.भागे भागे परिजन जब दोवारा वापस एसएनसीयू पहुचे तब वहां जगह नहीं होने की बात कहा गया आखिर कार बच्चे ने दम तोड़ दिया.
बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. मौके पर परियाजनो ने आरोप लगाया कि बच्चे को एसएनसीयू से अगर बाहर नहीं निकला जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी.शुरूआती दौर में भी अगर डॉक्टर देखकर सिजेरियन किये होते तब कोइ खतरा नहीं होता. इधर मौके पर पहुचे सिविल सर्जन मृगेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि सिजेरियन के लिए डिसीजन मेकिंग में चूक हुई. अस्पताल में एक मात्र महिला चिकित्सक होने से इस तरह की परेशानियां हो रही है. इस घटना में जिस भी स्तर की परेशानी हुई है उसकी जांच की जायेगी. इस मामले में कठोर कार्रवाई की जायेगी.
मरीज और परिजन पर एफआइआर: बिहारशरीफ. मान्या नर्सिग होम के चिकित्सक डॉ.रंजना ने लहरी थाने में क्लीनिक में तोड-फोड करने व धमकी देने की एफआइआर मरीज और उसक परिजनों पर करायी है.
एफआइआर में डॉ.रंजना ने कहा है कि रंजना कुमारी नामक मरीज यूटेरस का ऑपरेशन कराया था. बाद में मरीज के परिजनों ने पटना लेकर चले गये. उक्त लोगों ने बाद में आकर क्लीनिक में तोड़-फोड़ की एवं धमकी दी. साथ ही गाली गलौज करने का भी आरोप लगाया हैं. तोड फोड से लाखों की क्षति हुई हैं. चिकित्सक ने कहा कि इलाज के दौरान कोई लापरवाही नहीं की गयी थी
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