अंकल, ऑफिसरों के बच्चे यहां नहीं पढ़ते वरना...
Updated at : 07 Jan 2016 4:22 AM (IST)
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ठंड से ठिठुरते मासूमों से बेखबर हैं अधिकारी शेखपुरा : अंकल यहां ऑफिसरों के बच्चे नहीं पढ़ते,वरना हम बच्चों को विद्यालय की अव्यवस्था की यातनाएं नहीं सहनी पड़ती. यहां सालों भर विद्यालय परिसर में जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. सैकड़ों बार इसकी फरियाद अधिकारियों तक पहुंचायी गयी. इसके बावजूद किसी ने इसकी परवाह तक […]
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ठंड से ठिठुरते मासूमों से बेखबर हैं अधिकारी
शेखपुरा : अंकल यहां ऑफिसरों के बच्चे नहीं पढ़ते,वरना हम बच्चों को विद्यालय की अव्यवस्था की यातनाएं नहीं सहनी पड़ती. यहां सालों भर विद्यालय परिसर में जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. सैकड़ों बार इसकी फरियाद अधिकारियों तक पहुंचायी गयी. इसके बावजूद किसी ने इसकी परवाह तक नहीं की. खास कर इस ठंड के मौसम में नमी भरे फर्श पर बैठ कर ठिठुरने को विवश है. कृपया हमारी आवाज सीएम अंकल तक पहुंचा दो,
ताकि व्यवस्था में सुधार हो जाय. जिला मुख्यालय के प्राथमिक विद्यालय सदर ब्लॉक शेखपुरा में सैकड़ों मासूम बच्चों की यह बदहाली और फरियाद रौंगटे खड़े कर देने वाली है. दरअसल विद्यालय की बदहाल अवस्था की जड़ में स्थानीय जलापूर्ति जलमीनार है. जिसमें अक्सर लिकेज हो जाने से विद्यालय परिसर में पानी भर जाता है.
सालों भर इस जलजमाव की स्थिति का सालों से जब निदान न हो सका तब शिक्षा की इच्छा शक्ति रखने वाले बच्चे स्थानीय विद्यालय से पलायन करने को विवश है. आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर बच्चे भी सरकार की शिक्षा का अधिकार योजना से महरूम हो रहे हैं. सबसे बड़ी विडंबना है कि जिला मुख्यालय के सदर ब्लॉक की स्कूल के भी समस्या को लेकर जब अधिकारी संवेदना नहीं दिखाते तब सुदूर गांवों के स्कूलों की स्थिति का महज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
क्या बच्चों की समस्या : विद्यालय परिसर चारों ओर जलजमाव और गंदगी गंभीर समस्या है. परिसर में जलजमाव और गंदगी गंभीर समस्या है. परिसर में जलजमाव के कारण बच्चे पीटी और एसेंबली का लाभ नहीं ले रहे. इससे न तो शिक्षा की मानकता पूरी हो रही और ना ही बच्चों का शारीरिक विकास में व्यवस्था का योगदान मिल रहा. परिसर में जलजमाव से परिजन भी काफी चिंतित रहते. बच्चों को स्कूल तो भेजते हैं, परंतु यहां हमेशा डेंगू समेत अन्य मच्छर एवं बीमारियों के संक्रमण से आशंकित रहते हैं. इसके साथ ही जलजमाव के कारण विद्यालय का फर्श और दीवारों में डैंप मारती है, जिसके कारण वहां बैठने वाले बच्चों का इस कड़ाके की ठंड में पूरी घंटी गुजारनी मुश्किल जो जाती है.
अक्सर बीमार होते हैं बच्चे : विद्यालय की एचएम चंद्रावती कुमारी कहती है कि विद्यालय में 198 बच्चों का नामांकन है. अक्सर बच्चे अनुपस्थित भी रहते हैं. इसका मुख्य कारण बीमार होना ही कॉमन रहता है. यहां बेंच की कोई व्यवस्था नहीं है. इसके कारण बच्चों को जमीन पर प्लास्टिक अथवा जूट का बोरा बिछा कर बिठाया जाता है.
अक्सर अभिभावकों के नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है. विभागीय बैठकों में दर्जनों बार समस्याएं रखी गयी, परंतु पहल नहीं किया जा सका. विद्यालय प्रबंधन की विवशता और विभाग की अनदेखी से विद्यालय की समस्या सालों से विराजमान है.
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