जिले में खेल प्रतिभाओं की हो रही अनदेखी

शेखपुरा : एक वक्त था जब खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं की भरमार थी. इन प्रतिभाओं को खेल मैदान पर फतह करना एक नीयती बन गयी थी.वह वक्त सन 1973 का था.आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में उसी जज्बे की जरूरत है. क्योंकि खेल और शिक्षा के बेहतर समायोजन से ही आदर्श प्रतिभा का […]
शेखपुरा : एक वक्त था जब खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं की भरमार थी. इन प्रतिभाओं को खेल मैदान पर फतह करना एक नीयती बन गयी थी.वह वक्त सन 1973 का था.आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में उसी जज्बे की जरूरत है. क्योंकि खेल और शिक्षा के बेहतर समायोजन से ही आदर्श प्रतिभा का निर्माण होता है. शेखपुरा एक मायने में प्रतिभा का धनी है. परंतु एक जो इस जिले की दुर्भाग्य है वह महाविद्यालयों में खेल की जर्जर और लचर व्यवस्था का है. खेल प्रतिभाओं के लिए सरकार की योजनाओं से खेल सामग्रियां कॉलेज में संपूर्ण है. इसके लिए राशि की भी कोई कमी नहीं है. अगर कमी है तब छात्र और महाविद्यालय प्रबंधन के इच्छा शक्ति की.
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