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मौसम की बेरुखी से किसानों को सताने लगी चिंता

Updated at : 01 Jul 2018 1:06 AM (IST)
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मौसम की बेरुखी से किसानों को सताने लगी चिंता

शेखपुरा : माॅनसून के दगा देने को लेकर जिला इस बार सूखाड़ की ओर बढ़ चला है. माॅनसून आने के एक पखवारे के बाद भी जिले के किसी क्षेत्र में अभी तक झमाझम बारिश नहीं हुई है. खरीफ खास कर धान के बिचड़े डालने के लिए खेतों में पानी नहीं है. बहुत कम किसान अपनी […]

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शेखपुरा : माॅनसून के दगा देने को लेकर जिला इस बार सूखाड़ की ओर बढ़ चला है. माॅनसून आने के एक पखवारे के बाद भी जिले के किसी क्षेत्र में अभी तक झमाझम बारिश नहीं हुई है. खरीफ खास कर धान के बिचड़े डालने के लिए खेतों में पानी नहीं है. बहुत कम किसान अपनी निजी मेहनत से कुछ खास क्षेत्रों में धान का बिचड़ा डाले हैं. जिले के किसानों की निगाह अब भी आसमान की ओर टिकी है. जानकारी के अनुसार, जिले में 25 हजार हेक्टेयर भूखंड पर धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है.

जिला कृषि विभाग द्वारा दूसरे प्रकार के फसल के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किया है. लेकिन पानी के अभाव में कृषि विभाग की योजना को किसान धरती पर उतारने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं. वर्षा के अभाव में अब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखनी शुरू हो गयी हैं. जून माह में जिले में औसतन 165 मिमी बारिश होती था. इस साल जून माह बीत जाने के बाद अभी तक मात्र 41 मिमी बारिश ही हो पाया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले मई माह में भी वर्षापात कम ही था. मई माह का औसत वर्षापात यहां 32 मिमी है. लेकिन, इस साल मई माह में भी 20 मिमी से कुछ कम ही बारिश दर्ज हो पायी है.

बरसात की बेरुखी ने यहां किसानो की चिंता बढ़ा दी है. उसी प्रकार कृषि विभाग के अधिकारी भी चिंतित होते जा रहे है. उधर, इन चिंता और आशंका को नजरअंदाज करते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी धान के बिचड़ा डालने का समय शेष है. इस साल माॅनसून यहां बेहतर रहेगी. कृषि विभाग द्वारा किसानों के हर चिंता का समाधान किया जायेगा.

मॉनसून ने दिया धोखा तो धान की खेती में होगी परेशानी
मुद्रा योजना से लाभुकों को दिये गये 72.41 करोड़ लोन
व्यवसायियों को हो रहा लाभ
चालू वित्त वर्ष में 17 हजार 60 लाभुक इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं. इन लाभुकों के बीच 72 .41 करोड़ लोन के रूप में बांटे जा चुके हैं. लाभुक अपनी इच्छानुसार रोजगार करने में लगे हुए हैं. गरीब, असहाय लोगों को स्वावलंबी बनने में योजना कारगर साबित हो रही है. लोन में लेने में कोई गारंटर की जरूरत नहीं है.
रविकांत, एलडीएम, नालंदा
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