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VIDEO : ससुराल में प्रताड़ना झेलने वाली सोनी ने चुना समाज में शिक्षा का अलख जगाने का रास्ता

Updated at : 07 Jul 2017 10:06 PM (IST)
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VIDEO : ससुराल में प्रताड़ना झेलने वाली सोनी ने चुना समाज में शिक्षा का अलख जगाने का रास्ता

रंजीत कुमार शेखपुरा: समाज में आज भी एक वाक्य अक्सर ससुराल में प्रताड़ित विवाहिता को सुनना पड़ता है कि एक बेटी जब ससुराल की दहलीज में प्रवेश कर जाती है तब वहां से वापसी उसकी अर्थी ठीक होता है. बेटी को बोझ समझ कर एक लाचार मां-पिता के इस वाक्य को बिहारमें शेखपुरा के बरबीघा […]

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रंजीत कुमार

शेखपुरा: समाज में आज भी एक वाक्य अक्सर ससुराल में प्रताड़ित विवाहिता को सुनना पड़ता है कि एक बेटी जब ससुराल की दहलीज में प्रवेश कर जाती है तब वहां से वापसी उसकी अर्थी ठीक होता है. बेटी को बोझ समझ कर एक लाचार मां-पिता के इस वाक्य को बिहारमें शेखपुरा के बरबीघा कि सोनी ने पूरी तरह खारिज कर दिखाया है. दरअसल लगभग 5 साल पूर्व बियाही गयी बरबीघा के सामाचक डगर पर निवासी तनिक प्रसाद सिंह की पुत्री सोनी को जब ससुराल में प्रताड़ना सहने में सारे हदें पार करना पड़ा. तब मां-बाप का सहारा लेकर वह खुद अपने पैरों पर खड़ी हो गयी.

तीनसाल के पुत्र के सहारे इस लंबी आयु के जिंदगी का नैया पार लगाने के लिए सोनी ने अपने दम पर बरबीघा के मिशन चौक पर एक प्राइवेट कोचिंग संस्थान की शुरुआत की. अपने आप में प्रेरणा का स्रोत बनी सोनी ने साफ लफ्जो में कहा कि प्रताड़ना के बाद भी सामाजिक और पारिवारिक रूप से अगर एक बेटी को मां बाप भाई ओर समाज का सहारा मिल जाए तो वह हर यह मुकाम हासिल कर सकती है जो एक बेटे के लिए भी संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि आज की बेटियां अगर थोड़ी भी शिक्षा हासिल कर ले तो वह कभी भी अकेली अबला और बोझ बनकर नहीं बल्कि बोझ उठाने वाली बेटी का रोल अदा कर सकती है.

प्रताड़ना से मिला अपने दम पर जीवन जीने की प्रेरणा
करीब 5 साल पूर्व वर्ष 2012 में सोनी की जब शादी हुई थी. तब उसे यह मालूम नहीं था कि उसकी जिंदगी का दामन जिस हाथों में दिया जा रहा वह एक सामाजिक व्यक्ति नहीं है. नशे की आदी और दहेज लोभी के साथ-साथ निकम्मा व्यक्ति के हाथों में उसकी जिंदगी का बागडोर सौंप दिया गया है. शादी के बाद जब सोनी अपना ससुराल गई तब वहां उसे पति के साथ ससुराल वालों ने प्रताड़ना की सारी हदें पार कर दी. इस दौर में वह ससुराल वालों के हाथों कई बार बर्बरतापूर्वक पिटाई का भी शिकार हुई.

इतना ही नहीं गला रेतकर उसकी हत्या का भी प्रयास किया गया. हालांकि हत्या के इस कोशिश की घटना पीड़ित सोनी के जीवन के लिए आखरी प्रताड़ना साबित हुई. और वह अपने पुत्र विधाता शंकर स्वामी के साथ वापस अपने मां-बाप के घर लौट आई.

समाज में शिक्षा का अलख जगाने चली सोनी
खुद स्नातक तक की शिक्षा हासिल करने वाली सोनी में समाज के अंदर शिक्षा का अलख जगाने का रास्ता चुना और उसी में अपने एक बेटे के साथ जिंदगी के परवरिश का साधन का भी जुगाड़ किया. लगभग डेढ़ सालों तक दूसरे के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक के रुप में काम करने वाली सोनी ने जब थोड़ी सी पूंजी एकत्रित की तब एक ऐसा वक्त भी आया जब वह खुद अपने पैरों पर स्थापित कर समाज में शिक्षा का अलख जगाने की शुरुआत की. अपने कोचिंग संस्थान के उद्घाटन समारोह के मौके पर सोनी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में जिस प्रकार क्षेत्रीय नेत्री पूनम शर्मा में सक्रिय भूमिका निभाई उन से प्रेरणा लेकर कुछ करने का जज्बा ले सकी.

लोगों ने सोनी के प्रयास का किया सराहना
ससुराल में प्रताड़ना की सारी हदें झेलने वाली सोनी जब अपने मायके की वापसी के बाद अपने पैरों पर ही खुद को स्थापित करने की पहल करनी शुरू की. तब समाज में उसके लोगों ने जमकर सराहना शुरू कर दी.सोनी के साहसी कदम को लेकर भाजपा नेत्री पूनम शर्मा ने भी कहा कि कभी अपने ससुराल में प्रताड़ना झेल रही सोनी भले ही मजबूर अबला थी. लेकिन आज उसके साहसी कदम ने बेटियों के अंदर एक बड़ी प्रेरणा भरने का काम किया है. इस मौके पर पार्टी नेता संजय कुमार उर्फ कारू सिंह, प्रमोद सिंह अनिल सिंह समेत अन्य लोग बड़ी तादाद में जुट कर सोनिका हौसलाफजाई किया.

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