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''मां'' शब्द में सागर से भी अधिक गहराई

Updated at : 14 May 2018 5:48 AM (IST)
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''मां'' शब्द में सागर से भी अधिक गहराई

शिवहर : अक्षर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में मदरर्स डे के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.जहां बच्चों ने सांस्कृतिक व रंगारंग कार्यक्रमों के द्वारा समा बांध दी .इस दौरान छात्रा तान्य तारा व वैष्णवी ने सैया जी से मेरा ब्रेकअप हो गया गीत पर रिकॉडिंग डांस करते खूब तालियां बटोरी. कार्यक्रम के दौरान […]

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शिवहर : अक्षर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में मदरर्स डे के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.जहां बच्चों ने सांस्कृतिक व रंगारंग कार्यक्रमों के द्वारा समा बांध दी .इस दौरान छात्रा तान्य तारा व वैष्णवी ने सैया जी से मेरा ब्रेकअप हो गया गीत पर रिकॉडिंग डांस करते खूब तालियां बटोरी.

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने एकल गीत सामूहिक नृत्य समेत विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.कार्यक्रम के दौरान मां की आरती की गई. जिसमें खुशी पुष्पा,मुस्कान,सृष्टि,आयुष, आदर्श ने लोगों को मां की भक्ति रस में सराबोर कर दिया. वहीं ओम साई राम गीत यश, विक्की, अलिसा, एलीना, अक्षत, अभिमन्यू ने गाकर लोगों के बीच उपस्थिति दर्ज करायी. जबकि काला चश्मा गीत पर तान्या तारा व वैष्णवी ने रिर्काडिंग डांस किया. प्रीति, सुप्रिया व माया का स्पीच को भी लोगों ने सराहा. रीया,आयुष, नीरज, अशुतोष,कुंदन,आराध्या, आदर्श के रंगारंग कार्यक्रम भी सराहनीय रहा.कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य प्रियंका सिंह ने कहा कि मां पूर्ण शब्द, ग्रंथ व महाविद्यालय है. मां शब्द में सागर से भी अधिक गहराई, हिमालय से भी अधिक उंचाई, आसमान से भी अधिक असीमता व धरती से भी अधिक सहनसीलता है. मां को जानने वाला ही महात्मा है. मां को जानने वाला ही परमात्मा का जान सकता है.
पूर्व जिला परिषद सदस्य अजब लाल चौधरी ने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला मां होती है .प्रथम पंक्ति में वही बच्चे आते हैं जिनकी मां जागरूक होती है .दूसरी पंक्ति में वैसे बच्चे आते हैं यह स्वयं जागरूक होते हैं .तीसरी पंक्ति में वे बच्चे आते हैं जिनके कक्षा के टीचर जागरूक होकर उन्हें दक्षता प्रदान करते हैं. बच्चा पहला उच्चारण मां शब्द से ही करता है मां ही अंगुली पकड़ कर बच्चों को चलना सिखाती है .कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ता रानी गुप्ता ने मां की महिमा को रेखांकित किया . कहा जन्म के बाद माता-पिता केवल बच्चे की परवरिश ही नहीं करते ,बल्कि उनके लिए गुरु का भी काम करते हैं. जिंदगी की अच्छाइयों और बुराइयों से लड़ने की क्षमता विकसित करते हैं.
निरंतर आगे बढ़ने का ऊर्जा प्रवाहित करते हैं .कार्यक्रम के दौरान जदयू के वरीय नेता विजय विकास ने जीवन में मां की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कई ऐसे उदाहरण है.जहां मां के बल पर बच्चों ने देश और दुनिया में परचम लहराया है. आज के परिवेश में बालिका शिक्षा बहुत ही जरूरी है. एक मां के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है . कहा जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी. कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी बैद्यनाथ शाहपुरी ने किया. इस दौरान प्राचार्य ने आगंतुक अतिथियों को बुके देकर सम्मानित किया. मौके पर संजीव कुमार सिंह ,रामप्रवेश राय समेत कई शिक्षक, शिक्षिका व बच्चे मौजूद थे.
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