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हस्तनिर्मित कला के जरिए बच्चों ने दिखायी देशभक्ति व कलात्मक कौशल की सुंदर झलक

Updated at : 06 Aug 2025 5:36 PM (IST)
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हस्तनिर्मित कला के जरिए बच्चों ने दिखायी देशभक्ति व कलात्मक कौशल की सुंदर झलक

SASARAM NEWS.फजलगंज डायट परिसर बुधवार को कला, नवाचार और देशभक्ति से सराबोर हो गया. मौका था तिरंगा थीम पर आधारित ब्रोच निर्माण प्रतियोगिता का. कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ व्याख्याता अंजलि सिंह ने किया.

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हस्तनिर्मित कला के जरिए छात्रों ने किया राष्ट्रीय गर्व का इजहार

डाइट में तिरंगा थीम पर ब्रोच निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन, दिखी छात्रों की रचनात्मकता

प्रतिनिधि, सासाराम ऑफिस.

फजलगंज डायट परिसर बुधवार को कला, नवाचार और देशभक्ति से सराबोर हो गया. मौका था तिरंगा थीम पर आधारित ब्रोच निर्माण प्रतियोगिता का. कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ व्याख्याता अंजलि सिंह ने किया, जिसका उद्देश्य छात्रों में हस्तनिर्मित कौशल और रचनात्मकता को विकसित करना था, जो उनके भावी शिक्षण पेशे में सहायक होगा. जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं अपनी सामग्री के साथ तैयार नजर आए. रंगीन कागज, रिबन, कपड़े के टुकड़े, सुई-धागा और साज-सज्जा की वस्तुएं– हर टेबल पर कलात्मक उत्साह की झलक थी. प्रतियोगिता में छात्रों ने तिरंगे की थीम पर सुंदर और विविध प्रकार के ब्रोच बनाये. कोई ब्रोच अशोक चक्र की बारीकी से सजा था, तो कोई झंडे की तीन रंगों की लहराती छटा को दर्शा रहा था. एक छात्रा ने बताया कि हमने तिरंगे के रंगों में अपनी भावना को पिरोया है. हर टांका, हर मोती देश के प्रति हमारे प्रेम को दर्शाता है. मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्याख्याता डॉ चंद्रप्रकाश मणि त्रिपाठी ने प्रतियोगिता के दौरान छात्रों के कार्यों का अवलोकन किया और उनके रचनात्मक कौशल की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां छात्रों को सिर्फ कलात्मक नहीं बनातीं, बल्कि उन्हें एक संवेदनशील और विचारशील शिक्षक बनने की दिशा में प्रेरित करती है. कार्यक्रम के दौरान अन्य व्याख्याताओं में डॉ पूर्णिमा पांडेय, डॉ अमरनाथ सिंह, डॉ ज्ञान प्रकाश तिवारी, मनीराज पांडेय, इफ्तेखार अहमद, अवध किशोर चौधरी और इंद्रजीत सिंह की उपस्थिति ने छात्रों को और भी प्रेरित किया. सभी ने बच्चों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी तरह नवाचार करते रहने की सलाह दी. इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों में राष्ट्रीय भावना को प्रबल किया, बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षण विधियों को अपनाने की दिशा में भी प्रेरित किया. अंत में आयोजक अंजलि सिंह ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और कहा कि यह प्रतियोगिता कोई अंत नहीं, बल्कि एक नयी शुरुआत है. हम चाहते हैं कि छात्र अपनी कला और नवाचार से आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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