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पर्याप्त सैंपल नहीं लेने से बढ़ सकती है नाइट ब्लड सर्वे की तिथि

Updated at : 25 Aug 2025 5:11 PM (IST)
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पर्याप्त सैंपल नहीं लेने से बढ़ सकती है नाइट ब्लड सर्वे की तिथि

रोहतास जिले को फाइलेरिया उन्मूलन हेतु स्वास्थ्य विभाग नाइट ब्लड सर्वे शुरू किया है.

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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 20 अगस्त से नाइट ब्लड सर्वे कर रहा विभाग सासाराम सदर. रोहतास जिले को फाइलेरिया उन्मूलन हेतु स्वास्थ्य विभाग नाइट ब्लड सर्वे शुरू किया है. जिले के सभी प्रखंडों में इसका 20 अगस्त से शुभारंभ किया गया था और 28 अगस्त को समाप्त करना था. लेकिन, निर्धारित तिथि तक पर्याप्त सैंपल नहीं लेने के कारण इसकी तिथि बढ़ायी जायेगी. इस सर्वे के माध्यम से फाइलेरिया के सूक्ष्म जीवाणुओं की पहचान की जा रही है, जो सामान्यतः रात में ही शरीर में सक्रिय होते हैं. इसकी जानकारी देते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ आसीत रंजन ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दिशा-निर्देश के अनुसार यह सर्वे प्रत्येक वर्ष किया जाता है और इस वर्ष भी किया जा रहा है. इस अभियान में तकनीकी सहयोग पिरामल फाउंडेशन की ओर से मिल रहा है. संस्था के गांधी फेलो सायान विश्वास के प्रोग्राम लीडर हेमंत व कृष्णकांत चौबे के साथ अन्य प्रतिनिधि सर्वे को सफल बनाने में जुटे है. इस अभियान को सफल बनाने के लिए पिरामल फाउंडेशन व जीविका के सहयोग से जिले के सभी संकुल संघ, ग्राम संगठन व स्वयं सहायता समूहों में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. इसमें आशा, आंगनबाड़ी, फैथ लीडर, युवा, जीविका की सीएम दीदी और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है. फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी फाइलेरिया शरीर के कई अंगों जैसे हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष को प्रभावित कर विकलांगता व कुरूपता का कारण बनता है. राज्य स्वास्थ्य समिति के अनुसार यह बीमारी बिहार में रहने वाले सभी 13 करोड़ लोगों के लिए एक संभावित खतरा है. अधिकतर इसका संक्रमण बचपन में होता है. लेकिन, इसके लक्षण सामने आने में पांच से 15 साल तक का समय लगता है. चिकित्सकों के अनुसार सभी लोगों को साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन करना अनिवार्य होता है. दवा स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी लेनी चाहिए. हालांकि, दो साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे अलग रखा गया है. दवा का सेवन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या चिकित्सकों की निगरानी में ही करने की सलाह दी गयी है. जागरूकता अभियान की जिम्मेदारी जीविका की सामुदायिक पोषण साधनसेवी व स्वास्थ्य पोषण के मास्टर रिसोर्स पर्सन निभा रही है, जो गांवों में पहुंच लोगों को जागरूक कर रही है. ताकि वे नाइट ब्लड सर्वे में भाग लेकर फाइलेरिया मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग दें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN

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ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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