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नल जल योजना हुई फेल, चुएं के भरोसे मिल रहा है पानी

Updated at : 18 May 2024 9:02 PM (IST)
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नल जल योजना हुई फेल, चुएं के भरोसे मिल रहा है पानी

खंड क्षेत्र अंतर्गत उगहनी पंचायत की प्राथमिक विद्यालय औरैया में अध्ययन कर छात्र-छात्राएं इस तपिश भरी धूप में न तो चापाकल का पानी पी पा रहे हैं, और न ही शौचालय का प्रयोग कर पा रहे हैं. ऐसा नहीं कि यहां इस गांव में नल जल योजना नहीं है.

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चेनारी. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उगहनी पंचायत की प्राथमिक विद्यालय औरैया में अध्ययन कर छात्र-छात्राएं इस तपिश भरी धूप में न तो चापाकल का पानी पी पा रहे हैं, और न ही शौचालय का प्रयोग कर पा रहे हैं. ऐसा नहीं कि यहां इस गांव में नल जल योजना नहीं है. लेकिन, दुर्भाग्य यह है कि नल जल योजना का कनेक्शन विद्यालय के समीप नहीं पहुंचाया गया है. विद्यालय के पूर्वी छोर पर एक चापाकल मौजूद है, जिसमें से लाल पानी निकलता है. इससे न तो बच्चों को खिलाया जा सकता है, न ही वहां पर किसी बच्चों को जाने दिया जाता है. कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे औरैया गांव की प्राथमिक विद्यालय औरैया की छात्र-छात्राओं को पानी पीने के लिए अपने गांव से 1 किलोमीटर दूर जाकर पहाड़ी से निकलने वाले चुएं से पानी भरकर लाना पड़ता है. वहीं, रसोइयों को एक किलोमीटर दूर जाकर चुएं से पानी लाकर मध्याह्न भोजन को संचालित किया जाता है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार ने बताया कि विद्यालय के परिसर में अब तक नल जल योजना का कनेक्शन भी नहीं हुआ है. विद्यालय परिसर में शौचालय है, लेकिन पानी के अभाव में बच्चे खुले में ही शौच करने के लिए चले जाते हैं. विद्यालय के पूर्वी छोर पर आधा किलोमीटर दूर एक चापाकल है, जिससे लाल पानी निकलता है. विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा बच्चों को उस पानी का प्रयोग न करने की सलाह भी दी जाती है. विद्यालय के शिक्षक छात्राओं का स्वास्थ्य खराब न हो, इस भय के चलते छोटे स्कूली बच्चों की कौन कहे, शिक्षक और रसोईया भी इसके प्रयोग से डरने लगे हैं. रसोइया दो किलोमीटर दूर जाकर पहाड़ी से निकले चुएं से पानी लाकर खाना पकाती है, तो स्कूली बच्चे उक्त जगह पर जाकर लाने के बाद पानी पीने को मजबूर हैं. इन सबके बीच छात्राओं और विद्यालय में कार्यरत शिक्षक, रसोइया को भी शौचालय जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाये जा रहे चहारदीवारी के निर्माण भी आज तक नहीं हुआ है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय कैमूर पहाड़ी के ऊपर पदस्थापित होने की वजह से कोई भी चापाकल गाड़ने के लिए यहां पर नहीं है आ रहे हैं. नहीं चापाकल लगवाने के लिए पीएचडी विभाग के यहां आवेदन भी पूर्व में भी दिया गया था लेकिन इस पर कोई उक्त विभाग के द्वारा दिलचस्पी नहीं ली गई पुनः एक बार फिर विद्यालय में चापाकल लगवाने के लिए आवेदन दिया जा रहा है. इसकी जानकारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी दी गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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