चुनाव बाद भी स्नेहा को नहीं मिला इंसाफ, डीएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन

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चुनाव बाद भी स्नेहा को नहीं मिला इंसाफ, डीएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन

एक घंटे से अधिक समय तक बंद रहा समाहरणालय का दरवाजा

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सासाराम नगर. स्नेहा की मौत मिस्ट्री बन गयी है. मां व पिता इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं. लेकिन, उनको आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है. गुरुवार को फिर से कुछ संगठन के लोगों ने स्नेहा को इंसाफ दिलाने के लिए महावीर स्थान से शांतिपूर्ण मार्च निकाला, जो समाहरणालय के समक्ष आकर समाप्त होना था. लेकिन, यहां पहुंचते ही मामला बिगड़ गया. क्योंकि, डीएम उदिता सिंह से मुलाकात करना था और वह लंच में चली गयी. इसको लेकर डीएम कार्यालय के पास परिजनों को और समाहरणालय गेट के पास संगठन के कार्यकर्ताओं को इंतजार करना पड़ा. यह इंतजार करीब एक घंटे से अधिक चला. इस वजह से पुलिस ने गेट को बंद कर दिया और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी. भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती गयी. डीएम पहुंची, तो परिजनों ने उन्हें करीब तीन पन्ने का ज्ञापन सौंपा और उनसे बेटी को न्याय दिलाने की अपील की. डीएम ने उन्हें आश्वासन दिया. इसके बाद उनके परिजन बाहर निकले. यूपी के मुख्यमंत्री ने भी कहा था- स्नेहा के हत्यारों को हम नहीं छोड़ेंगे परिजनों ने बताया कि यह आश्वासन पहली बार नहीं मिला है. चुनाव में भरे मंच से उन्हें यह आश्वासन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिया था. सदर की वर्तमान विधायक स्नेहलता कुशवाहा के पक्ष में वोट मांगने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री फजलगंज स्टेडियम में पहुंचे थे और मंच से ही उन्होंने घोषणा की थी कि सासाराम की बेटी स्नेहा के हत्यारों को हम नहीं छोड़ेंगे. उन्हें यमराज के पास पहुंचायेंगे. लेकिन, इस आश्वासन के करीब तीन माह बीत चुके हैं. फिर भी इसमें अब तक केवल एक की गिरफ्तारी हुई है. लेकिन, उसे भी फंसाया गया है. यह बातें स्नेहा के पिता सुनील कुमार ने बतायी. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की मौत के नौ दिन बाद वाराणसी पुलिस ने एफआइआर दर्ज किया, जिसमें हत्या बताया गया और तीन महीने बाद उसे आत्महत्या बताया गया और दोनों ही रिपोर्ट एक ही पुलिस पदाधिकारी ने तैयार की है और भी कई मामले हैं, जिसको पुलिस ने अभियुक्तों को बचाने के लिए लिपापोती की है. अगर मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा, तो फिर हम 30 जनवरी से अनिश्चतकाल धरने पर बैठ जायेंगे. क्योंकि, ऐसी घटना किसी की और की बेटी के साथ न हो.

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Panchdev Kumar

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