रोहतास. हरित क्रांति ने देश को भुखमरी से बचाया, अब प्राकृतिक खेती हमें बीमारियों से बचायेगी. यह बातें सहायक निदेशक (रसायन) ने कृषि विज्ञान केंद्र बिक्रमगंज (रोहतास) में पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण के समापन अवसर पर कहीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं, लेकिन शुद्ध भोजन की चुनौती बढ़ रही है. इसका समाधान केवल प्राकृतिक खेती है, जो न सिर्फ स्वास्थ्य की गारंटी देती है बल्कि किसानों की आमदनी भी सुरक्षित करती है. बिक्रमगंज के आरा रोड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में 8 से 13 सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण में जिले के 10 प्रखंडों से आयी 30 कृषि सखियों ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के अंतिम दिन डीडीएम नाबार्ड ने कृषि सखियों को उत्पादों का खाता संग्रहण और विपणन की तकनीक सिखाते हुए कहा कि यदि प्राकृतिक खेती को संगठित ढंग से बाजार तक पहुंचाया जाए तो किसानों की आय दोगुनी से भी अधिक हो सकती है. प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागी कृषि सखियों को प्रमाणपत्र प्रदान किये गये. अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं ने कहा कि यह पांच दिन उनके लिए खेती के नये दृष्टिकोण की शुरुआत है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस ज्ञान को वे अपने गांव में फैलाकर किसानों की सेहत और समृद्धि दोनों को सुरक्षित करेंगी. कृषि सखियों को बताया जागरूक महिला किसान जिला कृषि पदाधिकारी ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की महिला विकास नीति का जिक्र करते हुए कहा कि कृषि सखियां अब फार्मर ट्रेनर बनकर गांव-गांव में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देंगी. वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जलज ने प्राकृतिक खेती को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धता बताया. वहीं, डॉ रमाकांत सिंह ने बीजामृत, जीवामृत, घानामृत, मल्चिंग और वापसा को प्राकृतिक खेती के पांच आधार स्तंभ बताते हुए इन्हें व्यवहार में उतारने का आह्वान किया. डॉ रतन कुमार ने चेतावनी दी कि रसायनयुक्त खेती से कैंसर जैसी घातक बीमारियां फैल रही हैं, जबकि प्राकृतिक पद्धति अपनाकर इनसे बचाव संभव है.
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