भस्मासुर से बचने के लिए गुप्ता धाम में छिपे थे भगवान शिव? जानें कैमूर की इस गुफा का रहस्य

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गुप्ता धाम में शिवलिंग का फोटो

कैमूर की पहाड़ियों में स्थित गुप्त धाम का रहस्य क्या है? जानिए भस्मासुर और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथा और बाबा गुप्तेश्वरनाथ की महिमा के बारे में।

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कैमूर पहाड़ी की गोद में स्थित प्रसिद्ध गुप्त धाम सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि कई पौराणिक कथाओं और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने इसी प्राकृतिक गुफा में शरण ली थी. गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से स्थापित शिवलिंग को श्रद्धालु बाबा गुप्तेश्वरनाथ के रूप में पूजते हैं. सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.

भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न हुए थे भगवान शिव

कठोर तपस्या के बाद मिला था वरदान: पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान मांगने को कहा. भस्मासुर ने ऐसा वरदान मांगा कि वह जिसके सिर पर हाथ रखे, वह तत्काल भस्म हो जाए. भगवान शिव ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे यह वरदान प्रदान कर दिया.

वरदान मिलते ही भस्मासुर में आया अहंकार

भगवान शिव को ही भस्म करने के लिए दौड़ा: वरदान मिलते ही भस्मासुर के भीतर अहंकार पैदा हो गया. उसने अपनी शक्ति का प्रयोग भगवान शिव पर ही करने की ठान ली. वह भगवान शिव के पीछे उन्हें भस्म करने के उद्देश्य से दौड़ पड़ा. भगवान शिव उससे बचने के लिए लगातार स्थान बदलते रहे.

कैमूर की गुफा से जुड़ी है गुप्त धाम की मान्यता

भस्मासुर से बचने के लिए यहां छिपे थे महादेव: स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव भस्मासुर से बचते हुए कैमूर पहाड़ी की इसी प्राकृतिक गुफा में आकर छिपे थे. इसी वजह से यह स्थान आगे चलकर गुप्त धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ. गुफा में मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग को श्रद्धालु बाबा गुप्तेश्वरनाथ के रूप में पूजते हैं.

भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर बचाया शिव को

मोहिनी के रूप से भस्मासुर हुआ मोहित: जब भस्मासुर भगवान शिव के पीछे पड़ा रहा, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया. मोहिनी के रूप और नृत्य से भस्मासुर मोहित हो गया. मोहिनी ने उसके सामने नृत्य करना शुरू किया और भस्मासुर भी उसकी हर मुद्रा की नकल करने लगा.

एक नृत्य मुद्रा में खुद ही भस्म हो गया भस्मासुर

मोहिनी की नकल करना पड़ा भारी: नृत्य के दौरान मोहिनी ने अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया. उसकी नकल करते हुए भस्मासुर ने भी अपना हाथ अपने सिर पर रख दिया. वरदान के प्रभाव से भस्मासुर स्वयं ही भस्म हो गया. इसके बाद भगवान शिव संकट से मुक्त हुए.

गुप्त धाम के प्राकृतिक शिवलिंग की होती है पूजा

मनोकामना पूरी होने की है धार्मिक मान्यता: गुप्त धाम की गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से स्थापित शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. स्थानीय मान्यता है कि यहां भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा गुप्तेश्वरनाथ का दर्शन करते हैं.

पुराणों की कथा और स्थानीय मान्यता का अनूठा संगम

सावन में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब: भस्मासुर की कथा पुराणों में भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी है. वहीं, भगवान शिव के गुप्त धाम की गुफा में छिपने की बात स्थानीय धार्मिक परंपरा और मान्यता का हिस्सा है. पौराणिक कथा, स्थानीय आस्था और प्राकृतिक गुफा का यह संगम गुप्त धाम को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाता है. सावन में यहां लगने वाला मेला और उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस धार्मिक स्थल की महत्ता को दर्शाती है.

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