प्राकृतिक खेती अपनाने से बढ़ेगी उपज, सुरक्षित रहेगी मिट्टी
Published by :ANURAG SHARAN
Published at :10 May 2026 4:01 PM (IST)
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SASARAM NEWS.फसलों का उत्पादन कम होने, रोग लगने और खेतों की उर्वरा शक्ति घटने से बचाने के लिए किसानों को रासायनिक खाद के प्रयोग से परहेज करना चाहिए.
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जीवामृत व ऑर्गेनिक खाद के उपयोग का किसानों को दिया गया प्रशिक्षण
नौ प्रखंडों के 335 किसानों ने लिया नेचुरल फार्मिंग का प्रशिक्षण.संझौली.
फसलों का उत्पादन कम होने, रोग लगने और खेतों की उर्वरा शक्ति घटने से बचाने के लिए किसानों को रासायनिक खाद के प्रयोग से परहेज करना चाहिए. खेतों की उर्वरा शक्ति बरकरार रखने व बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को ऑर्गेनिक व जीवामृत खाद अपनानी चाहिए. उक्त बातें जिले के काराकाट प्रखंड अंतर्गत मोथा गांव निवासी प्रगतिशील किसान लाल बाबू सिंह ने अपने एफएमटी कृषि फॉर्म पर किसानों को प्रशिक्षण देते हुए कही. शनिवार को सरकार के निर्देशानुसार जिले के नौ प्रखंडों के किसानों को ऑर्गेनिक खाद, जीवामृत और घन जीवामृत बनाने और खेतों में उसके प्रयोग की जानकारी दी गयी. जिला कृषि विभाग की ओर से नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत चयनित प्रगतिशील किसान लाल बाबू सिंह के मॉडल प्रदर्शन कृषि फॉर्म पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में संझौली, दिनारा, रोहतास, नासरीगंज, सासाराम, डेहरी, तिलौथू, चेनारी और नौहट्टा प्रखंड के 335 महिला व पुरुष किसान शामिल हुए. प्रशिक्षण में संबंधित प्रखंडों के कृषि समन्वयक व प्रखंड कृषि पदाधिकारी भी उपस्थित रहे.क्या है जीवामृत, घन जीवामृत व ऑर्गेनिक खाद
प्रगतिशील किसान लाल बाबू सिंह ने बताया कि जीवामृत, घन जीवामृत और ऑर्गेनिक खाद पूरी तरह प्राकृतिक उर्वरक हैं. इनमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का प्रयोग नहीं किया जाता है.कैसे बनायें जीवामृत
उन्होंने बताया कि 200 लीटर पानी में 10 लीटर देसी गाय का मूत्र, दो किलो गुड़, दो किलो बेसन और एक किलो बगीचे की मिट्टी मिलायी जाती है, जहां कभी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं हुआ हो. सभी पदार्थों को ड्रम में डालकर प्रतिदिन दो बार पांच-पांच मिनट तक डंडे से मिलाया जाता है. छह दिनों में जीवामृत तैयार हो जाता है. तैयार जीवामृत को एक एकड़ खेत में तीन बार में डाला जाता है.कैसे बनायें घन जीवामृत
घन जीवामृत तैयार करने के लिए 100 किलो देसी गाय का गोबर, चार किलो मूत्र, दो किलो गुड़, दो किलो बेसन व एक किलो बगीचे की मिट्टी मिलायी जाती है. इसे 15 से 20 दिनों तक छोड़ दिया जाता है. तैयार घन जीवामृत को एक एकड़ खेत में तीन बार में प्रयोग किया जाता है.ऐसे तैयार करें ऑर्गेनिक खाद
लाल बाबू सिंह ने किसानों को बताया कि 10 फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा और तीन फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें चारों तरफ प्लास्टिक की चादर बिछा दें, ताकि केंचुआ मिट्टी के संपर्क में न आये. गड्ढे में ईंट, पत्थर, शीशा या प्लास्टिक की बोतल जैसे पदार्थ नहीं डालें. इसमें पुआल, गेहूं का भूसा, घास, गोबर, सब्जियों का अपशिष्ट, राख व पेड़-पौधों के सूखे पत्ते डालें. यह सभी पदार्थ सड़कर डेढ़ से दो माह में ऑर्गेनिक खाद बन जाते हैं, जिसे किसान अपनी आवश्यकता अनुसार खेतों में प्रयोग कर सकते हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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